संपादकीय - यह आवश्यक तो नहीं है कि मित्रों के साथ केवल साहित्य की ही बात की जाए!
साहित्य कुञ्ज के इस अंक में
कहानियाँ
आख़िरी पेड़ का इंटरव्यू
पृथ्वी पर केवल एक पेड़ बचा था। उसे काँच के विशाल गुंबद में सुरक्षित रखा गया था। दुनिया भर के समाचार चैनल उसका इंटरव्यू लेने पहुँचे। एक प्रसिद्ध पत्रकार ने पूछा, “आप पृथ्वी के आख़िरी पेड़ हैं। आपको कैसा आगे पढ़ें
आख़िरी फ़ैसला
माइक से गूँजती शहनाई की मधुर धुन और आँगन में बैठी महिलाओं के हँसी-ठहाकों के बीच भी शैलजा का मन किसी अनजानी उदासी से घिरा हुआ था। घर उत्सव के रंग में डूबा था, पर उसके भीतर जैसे कोई आगे पढ़ें
खुमाड़ की आख़िरी पुकार
. . . हम जिसे छोड़ आते हैं, वह हमारा बेसब्री से इंतज़ार करता रहता है। क़रीब बीस साल बाद अपने गाँव खुमाड़ लौट रहा था। जब कुछ बड़े सपने लिए अपने इस गाँव से दिल्ली की ओर आगे पढ़ें
तुम्हारे सारे इल्ज़ाम मुझे मंज़ूर हैं
अहमदाबाद के प्रसिद्ध एल.डी. आर्ट्स कॉलेज में नया सत्र शुरू हो चुका था। एक ओर नए-नए कॉलेज में आए उत्साहित युवाओं के समूह मधुमक्खियों की तरह पूरे परिसर में घूम रहे थे, तो दूसरी ओर पुराने छात्र भी इधर-उधर आगे पढ़ें
भोलू का सपना
भोलू को सपने देखने की आदत थी। वह रात में तो सपने देखता ही था, लेकिन कभी-कभी दिन में भी सपने देखने लगता था। भोलू को उसके दादाजी तरह-तरह की कहानियाँ सुनाते रहते थे, जादुई नगरी की, परियों की, आगे पढ़ें
यादों का बैंक
शहर में एक नया बैंक खुला—“यादों का बैंक।” यहाँ लोग पैसे नहीं, अपनी यादें जमा करते थे। ख़ुशियों की यादों पर अच्छा ब्याज मिलता था, जबकि दुखद यादें हटाने के लिए लोग फ़ीस देते थे। एक दिन पचपन वर्षीय आगे पढ़ें
हास्य/व्यंग्य
अब नेता जनता को महँगाई के समर्थन में झूमने पर मजबूर कर रहे हैं
एक बाबा ने नेताजी को फोन किया, “मेरे कार्यक्रम में बहुत सारे लोग झूमते हैं। मैं बड़ा अद्भुत वशीकरण करता हूँ। अपने वशीकरण से मैं लोगों से आपको वोट भी दिलवा सकता हूँ। संक्षेप में कहूँ तो मैं आपके आगे पढ़ें
उम्मीदवार चुने जाने के बाद मतदाता पिटते हैं
“कहावत है न, ‘समझाने से न माने, हार खाने के बाद माने।’ कई लोग ऐसे हठीले होते हैं, जो किसी की अच्छी सलाह नहीं मानते, लेकिन जब झटका खाते हैं या हार जाते हैं, तो चुपचाप बैठ जाते हैं। आगे पढ़ें
दो जून की रोटी
(एक तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य) साहब! दो जून की रोटी मिल जाए, बस और क्या चाहिए? यह वाक्य सुनने में जितना सरल लगता है, उतना ही भयावह है। दरअसल यह कोई संतोष का वाक्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आगे पढ़ें
प्रभु श्री ट्रम्प के नाम एक निवेशक की विनय-पत्रिका
हे कृपानिधान, सदैव वंदनीय, लोकतंत्र-मुकुट, विश्व-विजय-पताका-धारक, श्री श्री 1008 ट्रम्प महाराज! आपको मेरा सादर चरण-स्पर्श पहुँचे। बाद ख़ैरियत के मालूम हो कि मैं एक अदना-सा लेखक हूँ। ऐसा लेखक, जिसे उसका पड़ोसी तक लेखक नहीं मानता। अख़बार वाले छापते आगे पढ़ें
सर जी का हमशक्ल साँड़
मेरा महल्ला आवारों का महल्ला है। यहाँ पर आपको क़दम-क़दम पर आवारा कुत्ते मिल जाएँगे। यहाँ पर आपको क़दम-क़दम पर आवारा पढ़े-लिखे मिल जाएँगे। आपको ही नहीं, मुझे भी अजीब लगता है जब पढ़े-लिखों को भी अपने महल्ले में आगे पढ़ें
आलेख
अच्छे पाठक चाहिएँ तो बच्चों के लिए अच्छा साहित्य लिखना होगा
कुछ वर्ष पहले प्रसिद्ध कवि, गीतकार और लेखक गुलज़ार चंडीगढ़ गए थे। वहाँ एक साहित्यिक कार्यक्रम में उन्होंने एक ऐसी बात कही थी, जो केवल साहित्यकारों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए विचारणीय है। उन्होंने कहा आगे पढ़ें
आंचलिक कहानियों के कालजयी कथाशिल्पी—फणीश्वर नाथ रेणु
फणीश्वर नाथ रेणु जिनकी कहानी , ‘मारे गए गुलफ़ाम’ पर बनी सुपरहिट फ़िल्म-तीसरी क़सम हिन्दी साहित्य की कहानी यात्रा फणीश्वर नाथ रेणु का उल्लेख किए बिना पूरी नहीं होती। उन्हें आंचलिक कहानियों का बेजोड़ कथाकार माना जाता आगे पढ़ें
पर्यावरण संरक्षण—रस्मों से परे, व्यावहारिक बदलाव
विश्व पर्यावरण दिवस को महज़ एक तारीख़ मानना भूल होगी; असल में यह धरती के साथ हमारे जुड़ते-बिखरते रिश्तों का सालाना लेखा-जोखा है। 1972 में जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन की नींव रखी, तो मक़सद सिर्फ़ उत्सव आगे पढ़ें
राजनीतिक असहमति बनाम व्यक्तिगत आलोचना
(वर्तमान राजनैतिक आचरण पर आलेख) लोकतंत्र का आधार ही मतभेद है। यदि समाज में केवल एक ही विचार शेष रह जाए, तो लोकतंत्र धीरे-धीरे निरंकुशता में बदलने लगता है। इसलिए पक्ष और विपक्ष दोनों लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनिवार्य स्तंभ आगे पढ़ें
रामवती: स्त्री-अस्मिता, लोकजीवन और प्रतिरोध का काव्य-विमर्श
(मयंक श्रीवास्तव के ग़ज़ल-संग्रह रामवती का समकालीन पुनर्पाठ) हिंदी साहित्य के इतिहास में कुछ रचनाकार ऐसे होते हैं जो अपने समय के केवल साक्षी नहीं होते, बल्कि उसके संवेदनशील व्याख्याकार भी होते हैं। वे अपने युग की धड़कनों को सुनते आगे पढ़ें
सत्य की ताक़त
सत्य एक ऐसा तत्त्व है जिसको हर समय साथ लेकर चलना मुश्किल होता है लेकिन साथ लेकर चलने वाला व्यक्ति एक महानता की ताक़त को हासिल कर लेता है। सत्य एक ताक़तवर औषधि की तरह होता है। काफ़ी समय आगे पढ़ें
सृजन की अस्मिता और साहित्यिक चोरी: मौलिकता बनाम परजीवी अभिव्यक्ति
(साहित्यिक चोरी पर आलेख) रचना-चोरी केवल अक्षरों की उठाईगीरी या शब्दों की पैबंदकारी नहीं है; यह किसी अन्य के अंतर्मन की छटपटाहट, उसके भोगे हुए यथार्थ, श्रम की स्वेद-बूँदों और उसकी सृजनात्मक अस्मिता का क्रूर अपहरण है। साहित्य के आगे पढ़ें
समीक्षा
अमानवीकरण को उकेरती कहानी
डॉ. शैलजा सक्सेना की कहानी ‘डियर जैनी . . .’ की समीक्षा कैनेडा की चर्चित प्रवासी कहानीकार डॉ. शैलजा सक्सेना की कहानी ‘डियर जैनी . . .’ अमानवीकरण के भीषण त्रास और कारुणिक संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। इसमें आगे पढ़ें
संस्मरण
सरेंडर पॉलिसी
मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि अपनी सर्विस काल में कभी चुनाव डियूटी में भी जाना होगा और कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान कराने का एक अहम रोल निभाना होगा। कहा जाता है कि होनी और अनहोनी आगे पढ़ें
नाटक
दो कौड़ी बनाम फूटी कौड़ी
(नाटिका) पात्र परिचय ज्ञानदेव: एक समर्पित, गंभीर और वैचारिक यूट्यूब शिक्षक (यू-ट्यूटर)। सादगीपसंद, जो डिजिटल मंच पर नि:शुल्क शिक्षा की क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं। अनामिका सिंह: एक प्रतिष्ठित टीवी चैनल की मुख्य एंकर। सत्ता, टीआरपी और अहंकार आगे पढ़ें
साक्षात्कार
रूट्स की बातें (साक्षात्कार) इला प्रसाद जी के साथ
लोकप्रिय एवं बहुचर्चित साहित्यकार इला प्रसाद जी का जन्म झारखंड की राजधानी राँची में हुआ। राँची विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातकोत्तर करने के पश्चात् आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से भौतिकी में पीएच. डी. की। आपने मुंबई आईआईटी में कुछ वर्षों आगे पढ़ें
कविताएँ
शायरी
समाचार
साहित्य जगत - विदेश
विश्व हिंदी दिवस कार्यक्रम
“मातृभाषा हमारे जीवन का आधार है, हिंदी के विकास में योगदान देनेवाले ग़ैर हिंदी भाषिक विद्वानों ने अपनी मातृभाषा का…
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ब्रिटेन की डॉ. वंदना मुकेश को मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग..
मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले विद्वानों को…
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यॉर्क, यूके में भारतीय प्रवासी समुदाय का ऐतिहासिक काव्य समारोह
दिनांक: 26 अप्रैल 2025 स्थान: यॉर्क, यूनाइटेड किंगडम 26 अप्रैल 2025 को यॉर्क इंडियन कल्चरल एसोसिएशन के तत्वावधान में…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
व्यंग्य की धार और सामाजिक सरोकारों से सजी भोजपाल साहित्य..
भोपाल। भोजपाल साहित्य संस्थान के अंतर्गत संचालित ‘व्यंग्य भोजपाल’ की मासिक व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन 10 मई को भोपाल…
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डॉ. रमा द्विवेदी कृत ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’ काव्य..
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (पंजीकृत न्यास) आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य शाखा एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान…
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डॉ. अमित धर्मसिंह के ग़ज़ल संग्रह ‘बग़ैर मक़्ता’ का हुआ..
दिल्ली। 20 दिसंबर, 2025 को आयोजित हुई नव दलित लेखक संघ की मासिक गोष्ठी में डॉ. अमित धर्मसिंह के…
आगे पढ़ेंसाहित्य जगत - भारत
डाॅ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता संग्रह ‘कवि के मन से’ का..
दिनांक 30 अप्रैल 2026 को साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सभागार में विख्यात कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के कविता…
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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की कृति ‘उगता सूर्य’ का हुआ विमोचन
शाहगंज (आगरा)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने श्री चित्रगुप्त भगवान संस्था सभागार में अपना 56वाॅं प्रांतीय अधिवेशन व शैक्षिक…
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डॉ. देवेंद्र शर्मा का काव्य संग्रह ‘अनुभव के आखर’ लोकार्पित
हैदराबाद, 15 दिसंबर, 2025— अपने दौर के अंतरराष्ट्रीय स्तर के वनस्पति शास्त्र वैज्ञानिक व कवि स्व. डॉ. देवेंद्र शर्मा…
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