इस अंक की कविताएँ

मेघ-गीत, आज़ादी का त्योहार - डॉ. महेंद्र भटनागर
दोहे : 15 अगस्त - डॉ.ऋषभदेव शर्मा
छोटी छोटी बातें, समय का वरदान, भाव मंजूषा - आशा बर्मन
बहुत दिनों बाद - अनुला
प्रवासी, स्वतन्त्रता - भगवत शरण श्रीवास्तव 'शरण'
राष्ट्रभाषा गान, हिन्दी महिमा -१, हिन्दी महिमा -२ - आचार्य संदीप कुमार त्यागी "दीप"
मेरे शब्द - मुकेश कुमार तिवारी
अमर प्रेम…… - शोभा महेन्द्रू
सीख - श्यामल सुमन
क्रंदन (एक अधूरा गीत) - कवि कुलवंत सिंह
मीठी स्मृति, दिशा विहीन, चिंता - धवन भगत
मेरे मुक्तक - डॉ. मीना अग्रवाल
वो चला आएगा, अंकुरित आशाएँ, कहाँ, मेरा बचपन - सुरेन्द्र कुमार 'अभिन्न'
औरत, नारी की सृष्टि - किरण राजपुरोहित ’नितिला‘
रात गए फोन, संकेतों की भाषा - लक्ष्मी शंकर वाजपेयी

मन तो बसता अपने देश, शत -शत प्रणाम - शशि पाधा

आरक्षण, लाचार भगवान - ई. भारत रत्न गौड़
वक़्त नहीं - महिमा बोकारिया
प्रेम मोहताज नहीं, आँसू बोलते हैं - संजीव कुमार बब्बर
आत्मपीड़ा, संयम - मुकेश पोपली
मोती बरसाता है सावन, तुमने मुझे याद किया होगा - कुसुम सिन्हा


इस अंक की शायरी

१९८४ का पंजाब, आईने के रूबरू - निर्मल सिद्धू
छोटी सी बिगड़ी बात को... - अब्बास रज़ा अलवी
मैं ढूँढती हूँ जिसे वो - अनुला
सामने काली अँधेरी रात, यह उजाला तो नहीं - द्विजेन्द्र ‘द्विज’
व्यथा - सत्येन्द्र सिंह चाहर

मछेरा ले के जाल आया है, दूर बस्ती से जितना घर होगा - सजीवन मयंक