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| 05.31.2008 |
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वही त्रिलोचन है |
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वही
त्रिलोचन है, वह – जिसके तन पर गन्दे
कपड़े हैं।
कपड़े भी कैसे – फटे लटे हैं
यही भी
फ़ैशन है, फ़ैशन से कटे कटे हैं।
कौन कह
सकेगा इसका यह जीवन चन्दे
पर
अवलम्बित है। चलना तो देखो इसका —
उठा हुआ
सिर, चौड़ी छाती, लम्बी बाहें,
सधे कदम,
तेज़ी, वे टेढ़ी मेढ़ी राहें
मानो डर
से सिकुड़ रही हैं, किस का किस का
ध्यान इस
समय खींच रहा है। कौन बताए,
क्या हलचल
है इस के रुँधे रुँधाए जी में
कभी नहीं
देखा है इसको चलते धीमे।
धुन का
पक्का है, जो चेते वही चिताए।
जीवन इसका
जो कुछ है पथ पर बिखरा है, तप तप कर ही भट्ठी में सोना निखरा है। |
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