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| 05.31.2008 |
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फेरीवाला |
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सपने लो
सपने लो
मीठे मीठे
सपने
अच्छे
अच्छे सपने
अपने मन
के सपने
सपने लो
सपनों से
ही मेरी झोली भरी हुई है –
घर के
बाहर के
पास के
पड़ोस के
देस के
बिदेस के
भूखे
ग्रहलोक के
नदी के
समुद्र के
जहाज के
विमान के
पर्वत के
बादल के
मुक्ति के
विधान के,
-
सपने ले,
मन चीते सपने लो
जिसका
विश्वास टूट गया हो
साथ और
कोई न हो
वह मेरे
सपने ले
जिसका बल,
अवसर पर धोखा दे जाता हो
वह मेरे
सपने ले
जिसको कुछ
करने की, भलीभाँति जीने की, इच्छा हो
वह मेरे
सपने ले
जिसको
इच्छा-मरण पसन्द हो चला आये
वह मेरे
सपने ले
गाँव-गाँव
नगर-नगर गली-गली डगर-डगर
मैं पुकार
रहा हूँ : सपने लो सपने लो
नये-नये
सपने लो, अच्छे-अच्छे सपने लो सपने लो |
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