आलेख
त्रिलोचन शास्त्री
- डॉ. मधु सन्धु
“आया फूल, गया,
पौधा निर्वाक् खड़ा है” -
डॉ. कविता
वाचक्नवी
’पुराने नाम याद हैं,
शक्लें बदल गई हैं‘ -
कवि त्रिलोचन
(शास्त्री) -
दिविक रमेश
‘क्षण
के घेरे में घिरा नहीं‘
: त्रिलोचन का स्मरण (पुस्तक चर्चा)
त्रिलोचन साहित्य
प्रतिनिधि कविताएँ
ध्वनिग्राहक
['दिगन्त'
से]
चीर भरा पाजामा [’उस
जनपद का कवि हूँ’
से]
उस जनपद का कवि हूँ
['उस
जनपद का कवि हूँ'
से]
आज मैं अकेला हूँ
गाय करती है घमौनी
जीवन का खेल
झाँय झाँय
करती दुपहरिया
['उस
जनपद का कवि हूँ'
से]
गेहूँ जौ के ऊपर सरसों की
रंगीनी
['उस
जनपद का कवि हूँ'
से]
अपराजेय ['दिगन्त'
से]