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10.01.2008

 

आलेख

त्रिलोचन शास्त्री - डॉ. मधु सन्धु
आया फूल, गया, पौधा निर्वाक्‌ खड़ा है - डॉ. कविता वाचक्नवी
पुराने नाम याद हैं, शक्लें बदल गई हैं - कवि त्रिलोचन (शास्त्री) - दिविक रमेश
क्षण के घेरे में घिरा नहीं : त्रिलोचन का स्मरण (पुस्तक चर्चा) - डॉ.ऋषभदेव शर्मा
लोकजीवन के अन्यतम चितेरे : कविवर बाबा त्रिलोचन - सुशील कुमार
त्रिलोचन : 'क्षण के घेरे में घिरा नहीं' लोकार्पित - डॉ. कविता वाचक्नवी
अपने पथ पर चलना ही उसका बाना है (भाग १) - प्रो. दिलीप सिंह

त्रिलोचन साहित्य 

प्रतिनिधि कविताएँ

भूमिका - केदारनाथ सिंह

ध्वनिग्राहक ['दिगन्त' से]
फेरीवाला [तुम्हें सौंपता हूँ से]
वही त्रिलोचन है [उस जनपद का कवि हूँ से]
चीर भरा पाजामा [उस जनपद का कवि हूँ से]
उस जनपद का कवि हू ['उस जनपद का कवि हूँ' से]
आज मैं अकेला हूँ [धरती से]
आरर- डाल ['ताप के ताये हुए दिन' से]  
गाय करती है घमौनी ['अरधान' से] 
जीवन का खेल ['अरधान' से] 
झाँय झाँय करती दुपहरिया ['उस जनपद का कवि हूँ' से] 
गेहूँ जौ के ऊपर सरसों की रंगीनी ['उस जनपद का कवि हूँ' से] 
अपराजेय ['दिगन्त' से]
सूरज से मैं ने कहा [तुम्हें सौंपता हूँ से]

अन्य कड़ियाँ

सृजनगाथा त्रिलोचन शास्त्री संकलन