अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ, क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श-ष, स, ह, क्ष, त्र, ज्ञ, ऋ, श्र-श्रृ
इंसानियत के वाक़ये दुशवार... इन्तज़ार रहता है इन्सान की हर ख्वाहिश..
इतना भी ज़ब्त मत कर इरादा वही जो अटल .. इश्क़ इसे रोशनी दे, उसे रोशनी दे ईद उल फ़ितर ईमानदारी से चला ...
- ऊपर
औरतों के जिस्म पर ...
खुदा अपना भी तो है यारो !
ग़म अगर दिल को मिला .. ग़म का सितारा ग़म नहीं हो तो ज़िंदगी ... ग़मे-हस्ती के सौ बहाने हैं
गीत ऐसा कि जैसे कमल
चेहरों पर हों कुछ उजाले ...
छायी थी मुझ पे बेख़ुदी ... छीन ली मौसमों ने है .. छोटी सी बिगड़ी बात को... छोड़े हुए गो उसको हुए है..
ज़ख़्म भी देते हैं मरहम ... जब कभी मैं अपने अंदर ... जब तलक़ आसमान बाक़ी है जब दिलों में प्यार का ... जब दुख में अबला रोती है जब नहीं तुझको यक़ीं अपना जब पुराने रास्तों पर से जब मेरी याद सताए तो जब से आबाद है लहूखाना जब से गई है माँ .. जबीं पर जिस के मेरा नाम .. ज़माना ख़राब है ज़माने से रिश्ता बनाकर.. ज़रा बता ज़रूरी तो नहीं जहाँ उम्मीद हो ना मरहम.. जाओ शीशे का बदन ले के.. जान उन बातों का मतलब जाना ही था तो ज़िंदगी में ... जाने कहाँ चले गये जाने कितने ही उजालों का जाने किन बातों की जाने कैसे
जाम हम बढ़के उठा लेते जिसकी आँख से आँसू ... जिसके मुँह में मिठास होती है जिसने ताउम्र अँधेरा सहा है जिससे थोड़ा लगाव होने लगा जिसे नसीब ने बख्शा उसे .. ज़िन्दगी का सामना ...
ज़िन्दगी को मज़ाक में लेकर् ज़िंदगी तुम रोज़ बदलती ... ज़िंदगी भर यही सोचता.. ज़िन्दगी से दूर जीते रहने की सज़ा से जुगाड़ जुदाई ज़ेह्न में और कोई डर नहीं ज़ेह्न में उसके खिड़कियाँ .. जैसा बोएँ वैसा प्यारे पाएँगे जैसा सोचा था जीवन ... जो ग़म है सीने में ... जो पल कर आस्तीनों में जो लोग जान बूझ के जो लोग मरते थे कभी ...
तप कर गमों की आग में
दर्द के क़िस्सों की ख़ातिर
दायरे से वो निकलता ... दावत बुला के धोखे से दिन का आगाज़
पंख थे परवाज़ की हिम्मत..
परछाइयाँ परेशान है आदमी पर्दा हटाया ही कहाँ है? पहचान
बड़े हौले से उसने आज ... बदलना चाहो भी तो
माना इसकी निढाल चाल नहीं
माना कड़ी धूप है
मुसलमान कहता मैं उसका हूँ मुहब्बत का ही इक मोहरा ...
मेरी मज़ार पे एक चिराग़ ...
रमज़ान बीता तो रवायत ..
रोटियाँ
संभल न पाना आँचल का सज़ा-ए-मौत दो सड़कें ख़ून से लाल हुईं सपना तब तक ही सुंदर है सब कुछ अपने मन का ही हो
सबकी सुनना, अपनी करना सबसे दिल का हाल न कहना
हम ले के अपना माल जो..
होके अपना कोई क्यूँ छूट..