अ-आ, इ-ई, उ-ऊ, ए-ऐ, ओ-औ, क, ख, ग, घ, च, छ, ज, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श-ष, स, ह, क्ष, त्र, ज्ञ, ऋ, श्र-श्रृ
इतना भी ज़ब्त मत कर इन्तज़ार रहता है इन्सान की हर ख्वाहिश..
इरादा वही जो अटल .. इसे रोशनी दे, उसे रोशनी दे ईमानदारी से चला ...
- ऊपर
औरतों के जिस्म पर ...
ग़म नहीं हो तो ज़िंदगी ...
गीत ऐसा कि जैसे कमल
चेहरों पर हों कुछ उजाले ...
छायी थी मुझ पे बेख़ुदी ... छीन ली मौसमों ने है ..
ज़ख़्म भी देते हैं मरहम ... जब कभी मैं अपने अंदर ... जब तलक़ आसमान बाक़ी है जब दिलों में प्यार का ... जब दुख में अबला रोती है जब पुराने रास्तों पर से जब मेरी याद सताए तो जब से आबाद है लहूखाना जब से गई है माँ .. जबीं पर जिस के मेरा नाम .. ज़माना ख़राब है ज़माने से रिश्ता बनाकर.. ज़रूरी तो नहीं जहाँ उम्मीद हो ना मरहम.. जाओ शीशे का बदन ले के.. जान उन बातों का मतलब जाना ही था तो ज़िंदगी में ... जाने किन बातों की जाने कैसे
जाम हम बढ़के उठा लेते जिसके मुँह में मिठास होती है जिसे नसीब ने बख्शा उसे .. ज़िन्दगी का सामना ...
ज़िन्दगी को मज़ाक में लेकर् ज़िंदगी तुम रोज़ बदलती ... ज़िन्दगी से दूर जीते रहने की सज़ा से जुगाड़ जुदाई ज़ेह्न में उसके खिड़कियाँ .. जैसा बोएँ वैसा प्यारे पाएँगे जो लोग जान बूझ के जो लोग मरते थे कभी ...
तप कर गमों की आग में
दावत बुला के धोखे से
पंख थे परवाज़ की हिम्मत..
परछाइयाँ परेशान है आदमी पर्दा हटाया ही कहाँ है? पहचान
बड़े हौले से उसने आज ...
माना इसकी निढाल चाल नहीं
मुसलमान कहता मैं उसका हूँ मुहब्बत का ही इक मोहरा ...
मेरी मज़ार पे एक चिराग़ ...
रमज़ान बीता तो रवायत ..
सज़ा-ए-मौत दो सड़कें ख़ून से लाल हुईं
सबकी सुनना, अपनी करना सबसे दिल का हाल न कहना
हम ले के अपना माल जो..