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| 07.02.2008 |
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स्टारटॉक - आइए हिन्दी बोलें! |
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अमेरिकी
स्कूलों और विश्वविद्यालयों में इस वर्ष की गर्मी की छुट्टियाँ इस अर्थ में
विशिष्ट और व्यस्तता भरी हैं कि इस समय छात्रों और भावी हिन्दी शिक्षकों के
लिए स्टारटॉक के माध्यम से हिन्दी सीखने-सिखाने की नि:शुल्क कार्यशाला चल
रही है। अमेरिका के पाँच शहरों - सैन डियागो,
लास एन्जेल्स,
ब्लूमिंगटन,
फ़ोर्ट वर्थ और केन्ट के स्कूल/यूनिवर्सिटी
में छात्रों के लिए हिन्दी प्रशिक्षण कार्यक्रम जून से अगस्त के
दौरान चलेंगे और भावी शिक्षक तैयार करने का दायित्व फ़ोर्ट वर्थ,
वाशिंगटन डी सी,
सियाटल,न्यूजर्सी
और न्यूयार्क के स्कूलों /विश्वविद्यालयों ने उठाया है। अमेरिकन काउन्सिल
फ़ॉर टीचिंग आफ़ फ़ारेन लैंगवेज(ACTFL)
ने
इस कार्यक्रम के लिए अपेक्षित धनराशि की व्यवस्था की है। मार्था अबॉट के
कुशल नेतृत्व में इस संस्था
से जुड़े विभिन्न अधिकारी और अमेरिकी विश्वविद्यालयों/स्कूलों
में हिन्दी पढ़ा रहे प्राचार्य/शिक्षक इस कार्यशाला को सफ़ल बनाने के
लिए प्रयत्नशीळ हैं।
यह
कार्यशाला पिछले वर्ष शुरू हुई । तब इसमें चीनी,
फ़ारसी,
अरबी और उर्दू को शामिल किया गया था।
पहली बार उसमें हिन्दी जोड़ी गई है। इस कार्यशाला का पहला उद्देश्य
अमेरिका के स्कूलों में हिन्दी का पठन-पाठन हाई स्कूल स्तर से शुरू करना है
ताकि वे विश्वविद्यालय स्तर तक हिन्दी पढ़ें और इस भाषा को पूर्ण रूपेण
आत्मसात कर सकें। भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार आदि
में सेतु का काम कर सकें।
हिन्दी और
चीनी - दोनों ही भाषाओं के शिक्षण का उद्देश्य इन देशों में व्यापार का
विस्तार है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि चीन की सरकार ने इस सूचना का तत्काल
स्वागत किया और अपनी ओर से मात्र शिक्षण सम्बन्धी जानकारियाँ एवं पुस्तकें
आदि ही उपलब्ध नहीं कराईं वरन अमेरिका सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई
धनराशि में अपनी ओर से भी काफ़ी योगदान दिया। परिणामत: अमेरिका के कई
हाई स्कूलों में चीनी भाषा की पढ़ाई शुरू हो चुकी है।
टेक्सास
के फ़ोर्टवर्थ(डलास) शहर में एच ई बी आइ एस डी स्कूल में,
जहाँ मैं व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित थी,
हिन्दी कार्यशाला ९ जून से २० जून तक थी। यह कार्यशाला पूर्णत: नि:शुल्क
थी। बच्चों एवं शिक्षकों के लिए समानान्तर सत्र चल रहे थे। बच्चों के लिए
इन सत्रों का संचालन भवानी पारपिया कर रही थीं। बच्चों के लिए दो सत्र थे
जिनमें क्रमश: सत्रह और अठारह छात्र-छात्राएँ थे। इन कक्षाओं में शिक्षण का
भार अंजली देसाई एवं शहनाज के कंधों पर था।
कार्यशाला का मूल उद्देश्य यह
सिखाना था कि किसी भी भाषा को उस भाषा से पूर्णत: अनभिज्ञ व्यक्ति को आसानी
से कैसे सिखाया जाय। इस सन्दर्भ में
सुश्री शैली ब्राउन की स्पैनिश भाषा सिखाने की कक्षाएँ सबसे सुन्दर
उदाहरण रहीं। बाद में तमाम प्रतिभागियों ने उनकी शैली का अनुकरण करते हुए
उन्हें हिन्दी सिखाई। कार्यशाला के अन्तिम दिन तक इस कार्यशाला की अन्य
शिक्षिकाएँ,
कैरी हैरिंगटन,
ग्रेटा लंगार्ड,तथा परीक्षक के रूप में उपस्थित डा मिमी मेट ने भी हिन्दी
के कुछ शब्द ही नहीं वरन पूरे-पूरे कई वाक्य,
शुद्ध उच्चारण के साथ सीख लिए थे।
स्टार टॉक
कार्यक्रमों की जानकारी इस वेब साइट पर उपलब्ध है
—
अमेरिकन
काउन्सिल फ़ार स्ट्डी आव फ़ारेन लैन्गवेज,
जिसने इस वर्ष ये कार्यक्रम आयोजित किए,
के
बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है :
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