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| 01.13.2008 |
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शिक्षायातन के प्रांगण में बाल दिवस |
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तारीख
२,
दिसम्बर २००७ शिक्षायतन की ओर से आयोजित किया गया
19
वां सांस्कृतिक संगीतमय बालदिवस हिन्दू टेम्पल सोसायटी ऑफ़ नॉर्थ
अमेरिका,
फ़्लशिंग,
न्यू-यॉर्क,
में
सम्पन हुआ। पूर्णिमा देसाई शिक्षयातन की निर्माता,
निर्देशिका अध्यक्ष एवं संचालिका है,
जिन्होंने बड़ी समर्थता के साथ संचालन की बागडोर संभाली। ज्ञानदीप को
उज्वलित करने की विधा को सरस्वती वंदना की सुंदर स्तुति से किया जिसमें
सृष्टि के आधार ब्रह्मा,
विष्णु,
महेश
बालस्वरूप उपस्थित रहे। मुख्य मेहमान वर्ल्ड बिज़िनेस फ़ोरम के चेयरमैन
श्री किरन मेहता व सभी श्रोताओं एवं कविगणों का स्वागत स्वरमय संगीत से
किया गया। सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अपने गुरुकुल में शिक्षा ले रहे
सभी बच्चों को पेश किया एक रंगमय मंच पर जो गीत ग़ज़ल ओर शास्त्रीय
संगीत से शुरू होकर वादन पर समाप्त हुआ। एक खास बात ध्यान देने योग्य
यह थी जहाँ बालक बालिकाओं ने "दीदी तेरा देवर दीवाना" कि धुन पर एक
अद्भुत रचना गाई
"अ-आ-इ-ई-उ-ऊ-ऋ,
ये है पहले स्वर हिंदी के
ए-ऐ-ओ-औ-और-अं-अः,
ये है बाकी स्वर हिंदी के"
अंग्रेज़ी वातावरण में हिन्दी भाषा सीखने का ये एक अनुपम निराला ढंग है
जिसमें स्वर और व्यंजन सुर ताल पर सीखने की प्रथा- जो पूर्णिमा जी ने
शुरू की है,
काबिले तारीफ़ है जिसके लिये वो बधाई की पात्र हैं। शिक्षा प्रदान का यह
सिलसिला पिछले १८ साल से लगातार चल रहा है ओर यह तब तक चलता रहेगा जब
तक शिक्षायतन के अपने प्रांगण में ये फूल नहीं महकते। यही पूर्णिमा जी
की आशा है और उनका सपना भी।
शिक्षायतन के प्रांगण में आना एक अनुभूति रही और साथ में एक अनुभव भी।
आज पहली बार इस समारोह में भाग लेते हुए यूँ लगा की जो बीज पूर्णिमा जी
ने कल बोये थे वे इतने फले फूले है बस यूँ कहिये एक महकता हुआ
गुलिस्ताँ बन गए हैं। इस संगठन का विकास अनेक त्रिवेणियों के रूप में
हो रहा है - हिन्दी भाषा का विकास,
संगीत,
नाट्य,
वायलिन वादन,
शास्त्रीय संगीत और तबले पर जुगलबंदी। यूँ लगता है अमरीका में यह
एक
अद्भुत महा विश्वविद्यालय है जहाँ पर वतन का दिल धड़क रहा है। एक मंच
पर इस प्रतिभाशाली नव युग की पीढ़ी को विकसित होता देखकर यह महसूस हुआ
कि हर युग में रविंद्रनाथ टैगोर का एक शंतिकेतन स्थापित हो रहा है।
विश्वास सा बंधता चला जा रहा है की देश हमसे दूर नहीं है। जहाँ जहाँ इस
तरह की संस्कृति पनपती रहेगी वहीं वहीं हिंदुस्तान की खुशबू फैलती
रहेगी। पूर्णिमा देसाई व उनके कार्यकर्ता टीम का
कार्यक्रम के अन्तिम चरण में आयोजित कवि गोष्टी में भाग लेने वाले थे श्री अशोक व्यास, देवी नागरानी, सरिता मेहता, बिन्देश्वरी अगरवाल, राम बाबू गौतम, नीना वही और आनंद आहूजा। मुख्य मेहमान श्री किरण मेहता के हाथों श्री पूर्णिमा देसाई की हाजरी में कवियों को “काव्य मणि” पुरुस्कार से सन्मानित किया गया। सुजलाम सुफलाम् माताराम वंदे मातरम !!! |
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