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| 07.29.2007 |
| विश्व मंच पर हिन्दी - अमेरिकी साहित्यकारों के
सन्दर्भ में इला प्रसाद |
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आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन का मूल विषय था - विश्व मंच पर हिन्दी। इस मूल बिन्दु को रूपायित करने वाली जो स्मारिका अमेरिकी हिन्दी साहित्य और साहित्यकारों के परिचय में प्रकाशित हुई उसके अतिरिक्त दो अन्य विशिष्ट घटनाएँ थीं जिन्होंने अमेरिका के लेखक वर्ग को सुखद स्वीकृति का अहसास दिया। तीन बहु प्रचारित प्रदर्शनियों के अतिरिक्त अमेरिकी साहित्यकारों की पुस्तकों की एक अलग प्रदर्शनी थी जहाँ अमेरिकी साहित्यकारों की २०० से अधिक पुस्तकें रखी हुई थीं। इस प्रदर्शनी में एक ओर जहाँ अमेरिका से प्रकाशित पहली पत्रिका "विश्वा" का १९७५ में प्रकाशित पहला अंक भी दर्शकों के देखने के लिए उपलब्ध था और तमाम पत्रिकाओं, विश्व विवेक, सौरभ, हिन्दी चेतना, क्षितिज, अन्यथा, हिन्दी जगत, विज्ञान प्रकाश आदि की प्रतियाँ मुफ़्त में वितरित की जा रही थीं वहीं दूसरी ओर वह पोस्टर था जो अमेरिका में हिन्दी भाषा से सम्बन्धित विभिन्न कार्यक्रमों की सचित्र झलकियाँ प्रस्तुत कर रहा था। इस पोस्टर में १९६० से आज तक की चुनी हुई तस्वीरें उपलब्ध थीं। प्रदर्शनी में जिन रचनाकारों की पुस्तकें थीं उनके भी चित्र वहाँ पर थे। तीन दिनों तक चली इस प्रदर्शनी के बाद प्रदर्शनी स्थल पर रखी अतिथि- पुस्तिका में वरिष्ठ कवि बालकवि बैरागी से लेकर वरिष्ठ पत्रकारों और सरकारी अफ़सरों तथा सामान्य प्रतिभागियों की खूबसूरत टिप्पणियाँ यह दर्शा रही थीं कि लोगों ने इस प्रदर्शनी को भी चाव से देखा और सराहा है।
अमेरिका के पच्चीस रचनाकारों की सैंतीस पुस्तकों का विमोचन भी विश्व हिन्दी सम्मेलन के पहले दिन विदेश मंत्री आनन्द शर्मा ने किया। इस समारोह के लिए विमोचित होनेवाली तमाम पुस्तकों के कवर पेज का एक आकर्षक पोस्टर तैयार किया गया था और इस विमोचन समारोह में वरिष्ठ लेखिका और कवियित्री सुनीता जैन, सुषम बेदी, अन्जना संधीर, रेखा मैत्र आदि से लेकर नवोदित लेखिक- लेखिकाओं जैसे, इला प्रसाद, शशि पाधा, देवी नागरानी, अमरेन्द्र कुमार, अभिनव शुक्ल आदि की पुस्तकें भी थीं। भारत के विभिन्न छोटे- बड़े प्रकाशनों, जैसे नेशनल बुक ट्रस्ट, वाणी प्रकाशन, प्रभात प्रकाशन, पेंग्विन इंडिया, जनवाणी प्रकाशन, पार्श्व पब्लिकेशन्स,जयभारती, हर्ष प्रकाशन, अल्फ़ा प्रिंटिग ( कैलीफ़ोर्निया) आदि ने अमेरिका के लेखकों की किताबें प्रकाशित कर इस महायज्ञ में सहर्ष सहयोग दिया।इस सारे आयोजन की परिकल्पना डॉ. अन्जना संधीर की थी और उनके परिश्रम से इसे बखूबी अन्जाम मिला। फ़ोटोग्राफ़्स :सौजन्य शशि पाधा और अमरेन्द्र कुमार |
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