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| 07.10.2007 |
| नयी हिन्दी पत्रिका
“वैश्विका” का लोकार्पण अमेरिका में - शेर बहादुर सिंह, न्यूयार्क |
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योगाचार्य बाबा रामदेव जी को "वैश्विका" भेंट करते हुए सुरेशचन्द्र शुक्ल ’शरद आलोक’ ७ जुलाई २००७ को हिन्दी महोत्सव न्यूजर्सी, यू.एस.ए. में नयी पत्रिका “वैश्विका” का लोकार्पण विश्वविख्यात योगाचार्य बाबा रामदेव जी के कर कमलों से सम्पन्न हुआ। पत्रिका के सम्पादक सुरेशचन्द्र शुक्ल ’शरद आलोक” गत २७ वर्षो से विदेशों (नार्वे) में हिन्दी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं तथा नार्वे से प्रकाशित द्वैभाषीय (हिन्दी-नार्वेजीय) द्वैमासिक पत्रिका स्पाइल-दर्पण का सन् १८८८ से सम्पादन कर रहे हैं और हिन्दी के सुपरिचित लेखक हैं। इस अवसर पर हिन्दी महोत्सव के संयोजक देवेन्द्र और रचिता सिंह ने बधाई देते हुए इसकी सफलता की कामना की। वरिष्ठ लेखक माणिक वर्मा ने आशा व्यक्त की कि यह पत्रिका दीर्घायु होगी और अन्य पत्रिकाओं की तरह जल्दी ही बन्द नहीं होगी। जाने-माने चिन्तक, लेखक और चित्रकार बाबा मौर्या ने कहा कि यह विदेशों में भारतीय संस्कृति की पताका फहरायेगी। न्यूयार्क में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने वाली पूर्णिमा देसाई ने कहा कि हम “वैश्विका” को सहयोग देंगे क्योंकि यह विदेशों में प्रवासी भारतीयों का सांस्कृतिक मंच बन सकता है। न्यूयार्क में हिन्दी का स्कूल चलाने वाले डॉ. राज गुप्ता एवं सुमन गुप्ता जी ने कहा कि आशा है कि “वैश्विका” हमारी संस्कृति को देश-विदेश में बचाने का कार्य करेगी। जयपुर में मीडिया के प्रोफेसर संजीव भानावत ने कहा कि सुरेशचन्द्र शुक्ल के नेतृत्व में “वैश्विका” हिन्दी पत्रकारिता में नये आयाम देगी। विश्व हिन्दी सम्मेलन की स्थानीय समिाति के सदस्य शेर बहादुर सिंह ने कहा कि यह पत्रिका हमारे के लिए जरुरी है। पेल्सवेनिया, यू.एस.ए. के सुधीर आर्य ने कहा कि पत्रिका “वैश्विका” के लिए हमारे द्वार खुले हैं। ओजस्वी कवि गजेन्द्र सोलंकी और कवियित्री अनीता सोनी ने भी बधाई दी। हिन्दी महोत्सव का विस्तार से समाचार शीघ्र ही पढ़ेंगे। |
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