अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
10.29.2014


यात्री के "खुला मंच" में संगीत, नाटक और शायरी का संगम
देवमणि पांडेय


"खुला मंच" कार्यक्रम में यात्री, इप्टा और पूर्वाभ्यास के रंगकर्मी, रचनाकार एवं कलाकार

शनिवार 4 अक्टूबर को मुम्बई के अँधेरी पूर्व स्थित रेलवे कालोनी के हाल में रंग संस्था यात्री थिएटर द्वारा "खुला मंच" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बार खुला मंच की ख़ासियत यह रही कि इस आयोजन में यात्री को एक नया साथी 'तुम भी डॉट कॉम' मिल गया। जिसके कारण उत्साह दुगना दिख रहा था। साथ ही दर्शकों का उत्साह उस समय चौगुना हो गया जब ये घोषित किया गया कि इस बार से "खुला मंच" की सभी प्रस्तुतियों को यू ट्यूब पर भी देखा जा सकता है।
यात्री और अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं के 12 कलाकारों और रचनाकारों नें खुला मंच में अपनी कला का प्रदर्शन किया। पूर्वाभ्यास के युवा कलाकार विपिन गौतम द्वारा शेक्सपियर के मशहूर नाटक हेमलेट के एक अंश की प्रस्तुति से शुरूआत हुई। उसके बाद पूर्वाभ्यास के ही अमन वशिष्ठ ने अँधा युग नाटक का एक अंश प्रस्तुत किया। इप्टा की वरिष्ठ रंगकर्मी निवेदिता बोंथियाल और मीशा ने एक संवेदनशील कहानी को भाव और अभिनय के साथ पेश किया। उपस्थित दर्शकों की नज़र में ये नाट्य प्रस्तुतियाँ बहुत असरदार थीं। ‘मोहब्बतें’ फेम मशहूर गायक उद्भव ओझा नें सुरों का ऐसा समां बाँधा कि पूरा हॉल तालियों की गडगड़ाहट से गूँज उठा। युवा गीतकार अविराम ने एक प्रेम गीत सुनाया। यात्री के कलाकार धर्मेन्द्र ने अपनी व्यंग्य रचनाओं पर दर्शकों को वाह-वाह करने पर मजबूर कर दिया।


"खुला मंच" कार्यक्रम में (बायें से) रंगकर्मी ओम कटारे, समाजसेवी के.के. मित्तल, शायर देवमणि पाण्डेय, वरिष्ठ रंगकर्मी नवीन कुमार

रंगकर्मी ओम कटारे रचित माँ के नाम चिट्ठी को सोनम सिंह ने प्रस्तुत किया। अपनी गंभीर विषय वस्तु और सहज संवाद सम्प्रेषण के कारण यह चिट्ठी दर्शकों को अन्दर तक भिगो गई। इसके बाद ओम कटारे लिखित एक लघु नाटक को यात्री के कलाकारों सोनम, प्रशांत, राकेश, केया और समीक्षा ने पेश किया। इस प्रयोगधर्मी प्रस्तुति में शब्दों के उच्चारण और भंगिमा के माध्यम से समाज और देश के वर्तमान हालात की अदभुत झाँकी पेश की गई। दोनों का निर्देशन ओम कटारे ने ही किया था।

कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी अशोक शर्मा और रंगकर्मी परोमिता चटर्जी ने चिरपरिचित नोक-झोंक वाले अन्दाज़ में किया। कार्यक्रम के अंत में मशहूर कवि- शायर देवमणि पाण्डेय ने अपनी शेरो-शायरी से श्रोता समुदाय को ऐसा लुत्फ़ंदोज़ किया कि सारा हॅाल ठहाकों और तालियों से गूँज उठा। खुला मंच की सफलता का अन्दाज इसी से लगाया जा सकता है कि पूरा हाल भरा हुआ था और दर्शक पीछे खड़े होकर कार्यक्रम का आनंद ले रहे थे।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें