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| 04.05.2009 |
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व्यंग्यकार डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी काव्य मधुबन का
‘व्यंग्यश्री’
सम्मान |
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डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को "व्यंग्यश्री" सम्मान प्रदान करते हुए डॉ. ओंकार चतुर्वेदी, अतुल चतुर्वेदी, डॉ. प्रेम जनमेजय, डॉ. देवेन्द्र ’इन्देश’ और अशोक हावा
कोटा :
कोटा की साहित्यिक संस्था काव्य मधुबन द्वारा देश के प्रसिद्ध व्यंग्यकार
डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को एक भव्य समारेाह में
‘व्यंग्यश्री’
सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान प्रति वर्ष किसी प्रतिष्ठित व्यंग्यकार
को प्रदान किया जाता है। पूर्व में यह सम्मान डॉ. हरीश नवल,
बंकट बिहारी पागल,
डॉ. सूर्यबाला,
विष्णु नागर,
डॉ. शेरजंग गर्ग तथा डॉ. बालेन्दु शेखर तिवारी को दिया जा चुका है। होली के
अवसर पर आयोजित अपने सालाना कार्यक्रम
‘फुहार’
के
दस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संस्था ने रोटरी क्लब के सहयोग से इस
वर्ष दिनांक सात एवं आठ मार्च को
‘दो
दिवसीय अखिल भारतीय व्यंग्य शिविर’
का
भी आयोजन किया जिसमें देश के अनेक लब्ध प्रतिष्ठित व्यंग्यकार शामिल हुए।
कार्यक्रम
का उदघाटन नई दुनिया सण्डे के संपादक विष्णु नागर ने किया। अध्यक्षता डॉ.
नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने की तथा विशिष्ठ अतिथि उदयपुर से पधारे
व्यंग्यकार डॉ. देवेन्द्र
‘इन्द्रेश’
थे। प्रथम सत्र में डॉ. राजश्री गोहदकर द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत किए
जाने के पश्चात् संस्था द्वारा संम्पादित व्यंग्य संकलन
‘व्यंगोदय’
का
विमोचन किया गया जिसमें देश के लगभग ३० व्यंग्यकारों की रचनाएँ शामिल की
गईं है। कार्यक्रम में डॉ. अजय अनुरागी के पत्र
‘राजस्थान
में व्यंग्य लेखन’
का
पत्र वाचन शरद उपाध्याय द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
साहित्यकार विष्णु नागर ने अपने वक्तव्य में कहा कि लेखक का लक्ष्य
पुरस्कार प्राप्त करना नहीं बल्कि जनता की परवाह करना अधिक आवश्यक है।
उन्होने साहित्य से धीरे-धीरे आलोचना लुप्त होने पर चिन्ता व्यक्त की।
उन्होंने लेखकों तथा समीक्षकों के रिश्तों पर भी कटाक्ष किए। डॉ.
‘इन्द्रेश
ने कहा कि ऐसे आयोजनों से राजस्थान में भी व्यंग्य लेखन की दिशा में
जागरूकता पैदा होगी। उन्होंने प्रदेश में व्यंग्य रचनाओं का सही मूल्यांकन
न हो पाने का कारण अच्छे समीक्षकों की कमी होना बताया। वक्ता शिवराम ने
व्यंग्य लेखकों को महज
व्यंग्यकारों की सूची में नाम लिखवाने की अपेक्षा अपने लेखन में बुराइयों
के खिलाफ आवाज़ उठाने का माध्यम बनाने तथा सही दिशा में इसका उपयोग करने पर
जोर दिया। भगवती प्रसाद गौतम ने व्यंग्य विधा को अद्वितीय विधा बताया।
अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने व्यंग्य को समाज के विकास के लिए
प्रयोग करने की बात कही वही संस्था के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि
व्यंग्यकार को किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए तथा उसे उसकी कलम
स्वतंत्र रहनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन विजय जोशी ने किया।
कार्यक्रम
के दूसरे सत्र में हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें मुख्य
अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार रघुराज सिंह हाडा थे तथा अध्यक्षता समाजसेवी श्री
जी डी पटेल ने की। इस कवि सम्मेलन में बृजेन्द्र कौशिक,
अरविन्द सोरल,
भगवती प्रसाद गौतम,
महेन्द्र नेह,
शून्याकांक्षी,
प्रेम शास्त्री,
हलीम आइना,
डॉ. देवेन्द्र
‘इन्द्रेश’,
शरद तैलंग,
ओम
नागर
‘अश्क’
तथा आर सी शर्मा
‘आरसी’
ने
अपनी रचनाओं सें श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। संचालन मुकुट मणिराज ने किया।
समारोह के
दूसरे दिन तृतीय सत्र में
‘व्यंगय
के सामाजिक सरोकार’
विषय पर डॉ. गीता सक्सेना ने पत्र वाचन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
व्यंग्यकार डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी थे तथा अध्यक्षता डॉ. प्रेम जनमेजय ने की।
लेखकों ने व्यंग्य लेखन को और अधिक आक्रामक एवं मारक बनाकर विसंगतियों एवं
कुप्रवृत्तियों पर चोट करने की आवश्यकता बताई । डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा
कि जब सब कुछ बदल रहा है तो व्यंग्यकार को भी अपने हथियार बदलने होंगे।
पुराने हथियारों से काम नहीं चलेगा क्योंकि विसंगतियाँ छाती ठोककर नंगी
हमारे सामने खड़ी है। विचार के बिना व्यंग्य लेखन की सार्थकता नहीं है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. प्रेम जनमेजय ने कहा कि मल्टीनेशनल
कम्पनियों ने नई पीढ़ी को मोटे-मोटे पैकेज का लालच देकर उनसे उनका मोहल्ला
तथा माँ-बाप दूर कर दिए हैं। व्यंग्य लेखन आदमी की प्रवृति व सोच बदलने में
सार्थक भूमिका अदा कर सकता है। कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि डॉ. ओंकार नाथ
चतुर्वेदी,
विष्णु नागर एवं डॉ. अजय अनुरागी थे। संचालन उषा झा ने किया। इसी स्र्रत्र
में डॉ. अजय अनुरागी के व्यंग्य संग्रह
‘दबाव
की राजनीति’
एवं कमलेश चौधरी की पुस्तक
‘किसमिस
के अंगूरी ठाठ’
का
भी विमोचन किया गया।विजय जोशी तथा वीरेन्द्र विद्यार्थी ने पुस्तकों पर
प्रकाश डाला।
दो दिवसीय समारोह का समापन प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को ‘व्यंग्यश्री’ सम्मान प्रदान किए जाने के साथ हुआ। काव्य मधुबन संस्था की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह तथा शाल प्रदान किया गया। डॉ. चतुर्वेदी ने अपनी दो हास्य व्यंग्य रचनाओं का पाठ भी किया जिसको सुनकर श्रोता लोटपोट हो गए। इन रचनाओं में पत्नी के द्वारा साड़ी की माँग तथा दूसरी रचना में बारात के आगे नृत्य करने का प्रशिक्षण देने का विषय समाहित था। इससे पूर्व युवा ग़ज़ल गायक रजब अली ने अपानी ग़ज़लों से सभाकक्ष को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक करण सिंह राठौड़ थे तथा अध्यक्षता डॉ. प्रेम जममेजय ने की। संचालन संस्था के सचिव अतुल चतुर्वेदी ने किया तथा संस्था के सचिव अशोक हावा ने आभार प्रदर्शन किया। |
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