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| 04.13.2008 |
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अप्रवासी
लेखिका की पुस्तक
‘वह
रात और अन्य कहानियाँ’
का लोकार्पण सम्पन्न |
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बाँये से - डॉ. शशिकला राय,
डॉ. आनंदप्रकाश दीक्षित,
उषाराजे सक्सेना,
इंग्लैंड
से आईं चर्चित अप्रवासी हिदी लेखिका श्रीमती उषाराजे सक्सेना के कहानी
संग्रह
‘वह
रात और अन्य कहानियाँ’
का
लोकार्पण रविवार दि. २३ मार्च की संध्या संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता
डॉ. आनंदप्रकाश दीक्षित ने की। डॉ. दामोदर खडसे,
श्री संजय भारद्वाज,
श्री सूरजप्रकाश,
सुश्री शशिकला राय एवं प्रकाशक श्री महेश भारद्वाज कार्यक्रम में विशिष्ट
अतिथि थे।
श्री संजय
भारद्वाज ने पुस्तक पर चर्चा आरंभ करते हुए कहा कि,
ये
कहानियाँ भारतीय पाठक का ब्रिटिश परिवेश से सहजता से परिचय कराती हैं। ये
कहानियाँ किसी फैंटसी,
पूर्वाग्रह या नॉस्टेलजिया से ग्रसित नहीं हैं। ये सीमाओं से मुक्त
विश्वग्राम के नागरिक की संवेदनाएँ हैं। सूक्ष्मता से बुनी इन कहानियों में
लेखिका की मिट्टी छूटने की कसक और जड़ों से जुड़ने की ललक दोनों प्रतिबिंबित
होती हैं।
‘वह
रात.....’
अँधियारे को उस दिशा में उद्यत करती है जहाँ स्वयं उषा उसकी प्रतीक्षा कर
रही है।
श्री
सूरजप्रकाश ने उषाराजे की कहानियों को डिस्टर्ब करने वाली कहानियाँ निरुपित
किया। दुनिया के अनेक देशों के पात्र उनकी कहानियाँ में हैं। स्थानीय
समस्याओं और मनोवैज्ञानिक दबाव का सजीव चित्र इनके माध्यम से सामने आता है।
ये किसी भी पक्ष में अंग्रेज़ी कहानियों से कमज़ोर नहीं हैं।
सुश्री
शशिकला राय ने कहा कि उषाराजे ब्रिटेन की लोकोक्तियाँ और मुहावरे ज़रूर
तलाशती हैं पर भाषा के लिए जड़ों की ओर लौटती हैं। उनकी कहानियाँ मानवीय
संबंधों की पड़ताल करती हैं। ये कहानियाँ बदलते संबंधों की सकारात्मक पहल
करती हैं,
स्त्री या पुरुष विमर्श की बजाय संबंधों के आत्मसंश्लेषण की वकालत करती
हैं।
‘वह
रात..’
की
कहानियाँ मनुष्य और शब्दों के बीच की खाई पाटने की कोशिश करती हैं।
प्रकाशक
श्री महेश भारद्वाज ने उषाराजे को उन अप्रवासी साहित्यकारों में से एक माना
जो हिंदी साहित्य को भारतीय साहित्यकारों जितना ही समृद्ध कर रही हैं।
उन्होंने लेखिका की दृष्टि को पैना और विराट बताया।
डॉ.
दामोदर खड़से ने अपने वक्तव्य में कहानियों को विदेशी धरती पर भारतीय मन
उकेरने वाली कथाएँ बताया। उन्होंने कहा कि यद्यपि कहानियों की भाव भूमि
विदेशी है पर भाषा अपनी है। उषाराजे से हुए पहले साहित्यिक परिचय का उल्लेख
करते हुए उन्होंने लेखिका की व्यवहार कुशलता की चर्चा की।
अपने
अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. आनंदप्रकाश दीक्षित ने इन्हें समृद्ध कहानियाँ
बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग कहानी के पाठक नहीं हैं,
उन्हें भी
‘वह
रात..’
की
कहानियाँ पढ़ने के लिए मजबूर करती हैं। ये कहानियाँ भारतीय और विदेशी
संस्कार एक साथ लेकर चलती हैं। विशेषता यह है कि पाठक जैसे चाहे इन्हें
ग्रहण करे,
लेखिका इसके लिए कोई आग्रह नहीं करती। कई कहानियों को उन्होंने भविष्य की
कहानियाँ बताया।
अपने
प्रत्युत्तर में लेखिका उषाराजे सक्सेना ने कहा कि अपनी कहानियों के माध्यम
से वे हिंदी के उन पाठकों तक पहुँचना चाहती हैं जो अंग्रेज़ी नहीं पढ़ते पर
ब्रिटिश परिवेश और अप्रवासी जीवन की पड़ताल करना चाहते हैं। भारत से
इंग्लैंड जाने की स्थितियों का वर्णन करते हुए लेखिका ने ब्रिटिश परिवेश को
समझना दूसरे प्लैनेट को समझने जैसा बताया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच
से उन्हें जीवन का नया मार्ग मिला। अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने
आपको
मातृभूमि के प्रति पुनः समर्पित करने की भावना को व्यक्त करते हुए उन्होंने
भीतर के भावों को गूँगे के गुड़ की संज्ञा दी। उल्लेखनीय है कि सक्सेना
दंपत्ति इंग्लैंड में हिदी के प्रचार-प्रसार के लिए लंबे समय से कार्यरत
हैं।
श्री
सुभांषु सक्सेना ने लेखिका की कहानी
‘वह
रात’
के
एक अंश का वाचन किया। श्रीमती वंदना पोरिया ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम
का सुचारु और प्रभावी सूत्रसंचालन डॉ. सुनील केशव देवधर ने किया। आरंभ में
अतिथियों का स्वागत लेखिका के नन्हें नाती व नातिन ने किया। श्रीमती
त्रिशिलावती काम्बले ने सरस्वती वंदना की। श्री अनिल अब्रोल ने पौधा देकर
हिदी आंदोलन की ओर से लेखिका का सम्मान किया। इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन गेट थ्रू गाइड्स, हिदी आंदोलन और आज का आनंद के तत्वावधान में किया गया। |
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