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ISSN 2292-9754

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09.07.2014


शिक्षक दिवस पर कवि सम्मेलन आयोजित, कुरूक्षेत्र
सूबे सिंह सुजान

कल दिनांक 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर अध्यापक वर्ग कुरूक्षेत्र की ओर से कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता उर्दू के अरूजी वरिष्ठ शायर डॉ. सत्य प्रकाश तफ़्ता ज़ारी ने की। मुख्य अतिथि आचार्य महावीर शास्त्री जी करनाल से, तथा वरिष्ठ अतिथियों मे डॉ. सरिता आर्य करनाल तथा डॉ. केवल कृष्ण रिषि कुरूक्षेत्र रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य शास्त्री, डॉ. तफ़्ता व डॉ. सरिता आर्य ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ उर्दू शायर बाल कृष्ण बेज़ार ने कहा कि आज के समय में शिक्षकों की महत्ता कम हुई है जिसे सांस्कृतिक व साहित्यिक मूल्यों को बढ़ावा देकर ऊँचा उठाया जा सकता है।

महावीर शास्त्री जी ने संस्कृत में गीत प्रस्तुत किया। डॉ. के.के. रिषि ने शिक्षकों के लिए शिक्षक पर नज़्म पढ़ी साथ ही माता के साथ-साथ पिता की भूमिका पर भी ग़ज़ल पढ़ी। नज़्म -"रहनुमाए कौम भी तू, कौम का मयमार भी, कारवाने ज़िंदगी का काफ़िला सालार भी, हर अंधेरी राह पर, शमाँ जला देता है तू, रहरवाने अक्ल को, चलना सिखा देता है तू"

डॉ. सरिता आर्य ने स्त्री की सामाजिक दशा पर व माँ को पहला गुरु बताया। तथा शिक्षक के लिये कहा - "हे शिक्षक, तुम बच्चों को लकीर का फकीर मत बनाना, उसे ऐसा बनाना के वो अपनी राह खुद बना सके!"

कुरूक्षेत्र विश्विधालय के अंग्रेज़ी विभाग के प्रोफेसर डॉ. दिनेश दधिची ने शिक्षक के शैक्षणिक जोश के तीन स्तरों पर कविता कही जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे नये शिक्षक मे शिक्षा के प्रति जोश होता है और फिर वह धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाता है।"

"मेरी प्रतिमा के साथ
और बहुत कुछ टूट गया
मेरे बच्चों के भीतर
बेआवाज़ लेकिन सिलसिलेवार!
मैं यूँ ही तो नहीं इतना शर्मसार!"

(डॉ. दिनेश दधीचि)

डॉ. तफ़्ता ने मनुष्य को मानवता धर्म पर तथा दार्शनिक विचारों की ऊर्द ग़ज़ल व रूबाई पढ़ी तथा कहा -"हर मुश्क़िल को करता है ये आसाँ, ज़र्रे को बनाता है हरदोशे सुलेमाँ, उस्ताद की अज़मत है बहर् तौर बुलंद, उस्ताद बनाता है गबीं (मूर्ख) को इन्साँ।"

कार्यक्रम में आचार्य शास्त्री, डॉ. तफ़्ता, डॉ. सरिता आर्य, बाल कृष्ण बेज़ार, को शाल व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। तथा डॉ. दिनेश दधिची, डॉ. के.के. रिषि, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान विनोद चौहान को स्मृति चिह्न के साथ सम्मानित किया गया।

अन्य कवियों में रमेश कुमार शर्मा, करनाल से अंजू शर्मा, संजीव कुमार, सूबे सिंह सुजान, दीदार सिंह कीरती, आबिद अली अंसारी ने भाग लिया।

कुरूक्षेत्र में भारी बरसात के बावजूद कवियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया व कार्यक्रम को सफल बनाया। सूबे सिंह सुजान व संजीव कुमार ने सभी कवियों व शिक्षकों का आयोजन की सफलता के लिए धन्यवाद किया।


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