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01.13.2008
 

शरद आलोक सम्मानित
- जयप्रकाश


चित्र में कुलपति प्रो रामप्रकाश सिंह शरद आलोक को पदक प्रदान करते हुए।

 

नवम्बर को लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में नार्वे में हिन्दी पत्रिकाओं स्पाइल-दर्पण और वैश्विका के सम्पादक  सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक को उनकी हिन्दी सेवाओं के लिए कुलपति प्रो रामप्रकाश सिंह ने शाल ओढ़ा कर स्मृतिचिन्ह भेंट किया। रामप्रकाश सिंह ने आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में शरद आलोक के सान्निध्य में व्यतीत समय की चर्चा करते हुए उनकी विदेशों में हिन्दी सेवा को सराहनीय बताया।  कार्यक्रम का शुभारम्भ विभागाध्यक्ष प्रो प्रेम शंकर तिवारी ने किया संचालन करते हुए प्रो कालीचरन सनेही ने अपने आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के संस्मरण सुनाये।

इस अवसर पर सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक ने न्यूयार्क में सम्पन्न आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक और यादगार सम्मेलन था।  उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि यहाँ पर ही उनकी पाँचवी काव्यकृति संभावनाओं की तलाश का विमोचन हुआ था जिसमे नयी कविता के शलाका पुरूष लक्ष्मीकान्त वर्मा, भारत-भारती पुरस्कार विजेता और प्रख्यात कवि कुँअर चन्द्रप्रकाश सिंह, अपने विद्यालय के गुरूओं डॉ. दुर्गाशंकर मिश्र और डॉ. ओमप्रकाश त्रिवेदी,  लखनऊ के पूर्व मेयर दाउद जी गुप्त, प्रो.  सूर्य प्रसाद दीक्षित और डॉ. आभा अवस्थी ने अपने विचार व्यक्त किये थे और यहाँ पर ही एक जनसभा में लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने माला पहनाकर सम्मानित किया था। शरद आलोक ने अपनी कवितायें सुनायीं और धन्यवाद दिया। अनेक विद्वानों ने शरद आलोक का माल्यार्पण किया और अपने विचार व्यक्त किये। उसी संध्या को आयोजित लखनऊ विश्वविद्यालय के कला विद्यालय के वार्षिक कार्यक्रम मे सुरेशचन्द्र शुक्ल शरद आलोक मुख्य अतिथि बनाया गया।   


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