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ISSN 2292-9754

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10.16.2014


मनोज शुक्ल ‘मनोज’ की काव्य कृति संवेदनाओं के स्वर का विमोचन
मनोज कुमार शुक्ल ‘मनोज’

वरिष्ठ कहानीकार एवं कवि श्री मनोज कुमार शुक्ल "मनोज" की काव्यकृति संवेदनाओं के स्वर का विमोचन गुंजन कला सदन जबलपुर के द्वारा स्व. डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव के जन्मोत्सव एवं 25 वां बुंदेली दिवस रजत जयंती समारोह के अन्तर्गत शहीद स्मारक जबलपुर के सभागार में आचार्य कृष्णकान्त चतुर्वेदी पूर्व अध्यक्ष संस्कृत पाली प्राकृत विभाग रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय एवं पूर्व निदेशक कालीदास अकादमी उज्जैन म.प्र.,के मुख्य आतिथ्य में एवं आचार्य सनातन बाजपेयी "सनातन", डॉ. गार्गीशरण मिश्र "मराल", आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, डॉ राजकुमार "सुमित्र", डॉ. विजय तिवारी ‘किसलय’ डॉ. राजेंद्र ऋषि, लीलाधर यादव, विवेक रंजन श्रीवास्तव, साधना उपाध्याय. कामतासागर, इरफान झांसवी, द्वारकेशगुप्त, विजयकुमार अनुज, सुरेश सोनी दर्पण, जैसे विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति एवं भारी संख्या में उपस्थित विद्वतजनों एवं नगर के सभी साहित्यकारों के बीच तालियों की करतल ध्वनि के बीच सम्पन्न हुआ । कृतिकार मनोज ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस कृति में उन्होंने अपनी मानवीय भावनाओं और संवेदनाओं को प्रस्तुत किया है सामाजिक, राजनैतिक विसंगतियों को अपने ढंग से रखा है । अपने जीवन के तिरेसठ वर्षीय पड़ाव पार करने के बाद एवं अपने पिता श्री रामनाथ ‘श्री नाथ’ की साहित्यिक विरासत को संजोए रखने में हम कहाँ तक सफल हुए हैं, यह हमारे पाठकगण ही बता सकते हैं । कार्यक्रम का संचालन श्री राजेश पाठक ‘प्रवीण’ एवं संस्था संस्थापक ओंकार श्रीवास्तव जी के कुशल संचालन में संपन्न हुआ।


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