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ISSN 2292-9754

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05.25.2016


कारागार में कविता एवं व्यंग्य पाठ
प्रस्तुति : लालित्य ललित

विश्व हिंदी पत्रकार एवं साहित्य समिति तथा ‘व्यंग्य यात्रा’ के तत्वावधान में, सितारगंज की संपूर्णानंद खुली जेल में, ‘कारागार में कविता एवं व्यंग्य पाठ’ का आयोजन किया गया। प्रेम जनमेजय ने समाज के हर वर्ग को व्यंग्य साहित्य से जोड़ने की इच्छा को इस आयोजन का उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि अपने द्वारा निर्मित गैंदे के फूलों की मालाओं को हमारे गले में पहनाकर बंदी भाईयों ने हमें अपने प्रेम में क़ैद कर लिया है। मुख्य अतिथि एस.डी.एम. श्री ए.पी. वाजपेयी ने कहा कि साहित्य के माध्यम से एक सकारात्मक माहौल पैदा होता है। साहित्य जोड़ने का काम करता है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक श्री टी.डी. जोशी ने स्वागत भाषण में कहा कि इस प्रकार के आयोजन खुली जेल की संकल्पना को बल देते हैं। 100 से अधिक बंदी भाईयों के समक्ष, लालित्य ललित द्वारा चयनित एवं संपादित ‘ प्रेम जनमेजय श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाओं का लोकार्पण एक बुज़ुर्ग क़ैदी कुंदन सिंह ने ए.पी. वाजपेयी, टी.डी. जोशी, डॉ हरीश नवल, यासीन अंसारी, प्रेम जनमेजय एवं लालित्य ललित, गौरव त्रिपाठी की उपस्थिति में किया। इस अवसर पर लालित्य ललित के कुशल संचालन में हरीश नवल, प्रेम जनमेजय, सुभाष नीरव,बलराम अग्रवाल, निर्मल गुप्त,अरविन्द तिवारी, दिलीप तेतरबे, अनुज त्यागी,दीपक सरीन,मीना अरोड़ा, गौरव त्रिपाठी, अंजुलि पंडित कौशलेंद्र प्रपन्न सहित अनेक लेखकों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए श्री टी.डी. जोशी ने कहा कि देश के विख्यात साहित्यकारों ने क़ैदियों के नीरस जीवन में जो रस घोला है वह जीवन भर याद रहेगा तथा जेल प्रशासन इसके लिए हृदय से आभारी है। कार्यक्रम के संयोजक यासीन अंसारी एवं लालित्य ललित थे।



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