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04.05.2009
 

बाल साहित्य संगोष्ठी
शमशेर अहमद खान


विगत दिनों, उत्तर प्रदेश रामपुर स्थित दयावती मोदी अकादमी के सभागार में बाल कल्याण संस्थान, कानपुर की ओर से प्यारे मोहन श्रीवास्तवकी स्मृति में आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत दिल्ली से आए बाल साहित्यकार शमशेर अहमद खान ने की। गोष्ठी में बच्चों के साथ ही साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में समारोह के संयोजक और कौस्तुंभ सम्मान से सम्मानित डॉ. राष्ट्रबंधु ने अपनी रचना प्रस्तुत की। रमा तिवारी ने बेर की गुठली पर अपनी कविता सुनाकर बचपन की यादें ताज़ा कर दीं। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा स्वरचित कविताएँ संकलित कराने की घोषणा की गई। इस अवसर पर चंपक, लोटपोट, चंदामामा, सुमन सौरभ, बालवाणी, बाल प्रहरी, चकमक, बच्चों का देश आदि बाल पत्रिकाओं क प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस कार्यक्रम की संयोजिका नीलम राकेश की कृति आतंकवादी और नन्हा अंकित डॉ. रोहिताश्व अस्थाना की मेरी ५१ बाल कविताएँ आदि पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।

जूनियर वर्ग की कविता पाठ प्रतियोगिता में यश अग्रवाल, प्रखर सक्सेना, दीपाक्षी वार्ष्णेय, मिडिल वर्ग में उत्कर्ष सिंह, दमनदीप, हिमांशु तथा सीनियर वर्ग में उपासना यादव, ईशा शर्म और नेहा शर्मा ने प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किए।

इस संगोष्ठी में सम्मानित होने वाले बाल साहित्यकारों में जी.आर रेड्डी, नलिनी प्रभादास, भूपेंद्र सिंह, वर्षा अग्रवाल, डॉ. सरोजिनी पांडे, स्नेहलता, डॉ. राजेन्द्र उपाध्याय, रमा तिवारी, हीरा सिंह, आर.पी. सारस्वत, के.के. यादव, डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी आदि प्रतिष्ठित बालसाहित्य व बाल कल्याण से जुड़े विभूतियों को सम्मानित किया गया।

 

इस समारोह में मुख्य अतिथी के रूप में बोलते हुए शमशेर अहमद खान ने कहा कि आज बाल साहित्यकार के समक्ष चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। विश्व परिप्रेक्ष्य में भारतीय बच्चों को जहाँ भारतीय संस्कृति के सभी तत्त्वों से साहित्य के माध्यम से जानकारी देने की जिम्मेदारी हमारी है, और जिसे हम सतत करते आ रहे हैं, वहीं भूमंडलीकरण के इस दौर में विश्व के सिमटने से आधुनिक तकनीक एवं अविष्कार और उनकी उपयोगिता आदि की पूरी सम्यक जानकारि देना हमारा नैतिक फ़र्ज़ है। बाल साहित्यकारों को इसे हमेशा ध्यान रखना चाहिए। स्थायी भाव की सृजनशीलता के साथ ही साथ जानकारी/सूचनापरक साहित्य आज आवश्यक हो गया है।

इसकी अध्यक्षता डॉ. रामनिवास मानव ने की।


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