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ISSN 2292-9754

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04.16.2017


डॉ. ऋषभदेव शर्मा "अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान" से अलंकृत
प्रस्तुति : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, सहसंपादक –‘स्रवंति’,
प्राध्यापक, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद – 500 004


राजेंद्र भवन ट्रस्ट, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह के अवसर पर प्रो. ऋषभदेव शर्मा को "अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान" ग्रहण करते हुए श्रीलंका में भारत की उच्चायुक्त डॉ.प्रज्ञा सिंह, जे. एस. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिमोहन तथा युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच के अध्यक्ष रामकिशोर उपाध्याय। साथ में, आशीष भारद्वाज एवं पीयूष भारद्वाज।

हैदराबाद, 7 मार्च 2017 (प्रेस विज्ञप्ति)

रूसी-भारतीय मैत्री संघ – दिशा (मास्को), हिंदी संस्थान – कुरुनेगल (श्रीलंका), सामाजिक संस्था – पहल (दिल्ली) और साहित्यक-सांस्कृतिक शोध संस्था (मुंबई) के संयुक्त तत्वावधान में दीनदयाल मार्ग, दिल्ली स्थित राजेंद्र भवन न्यास के सभाकक्ष में "अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह" का संक्षिप्त

रूसी लोक नृत्य-गीत प्रस्तुत करती हुईं
मारिया एवं वोल्गा।
 लेकिन भव्य आयोजन संपन्न हुआ. समारोह की अध्यक्षता जे. एस. विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रो. हरिमोहन ने की तथा संचालन उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, हैदराबाद के पूर्व अध्यक्ष प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने किया।

मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य गंगा, मुंबई के अध्यक्ष डॉ. योगेश दुबे मंचासीन हुए जिन्हें अंतरराष्ट्रीय हिंदी शलाका सम्मान से अलंकृत किया गया। प्रो. हरिमोहन को अंतरराष्ट्रीय हिंदी रत्नाकर सम्मान, हैमबर्ग विश्वविद्यालय - जर्मनी से आए डॉ. रामप्रसाद भट्ट को अंतरराष्ट्रीय हिंदी भास्कर सम्मान, साठ्ये महाविद्यालय – मुंबई के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह को अंतरराष्ट्रीय हिंदी मित्र सम्मान, श्रीलंका में भारत की उच्चायुक्त डॉ. प्रज्ञा सिंह को अंतरराष्ट्रीय साहित्य और भाषा सम्मान तथा हैदराबाद के वरिष्ठ समीक्षक एवं कवि प्रो. ऋषभदेव शर्मा को अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान प्रदान किए गए। अन्य सम्मानित विभूतियों में देश के विभिन्न अंचलों से पधारे चालीस से अधिक हिंदीसेवी और साहित्यकार सम्मिलित हैं।

इस अवसर पर अलंकृत विभूतियों के सम्मान में देशी-विदेशी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. विशेषतः रूस से आई हुईं किशोर नृत्यांगनाओं द्वारा दो रूसी लोक नृत्य-गीतों की जीवंत प्रस्तुति ने सभी आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मगध विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. विनय कुमार के धन्यवाद-ज्ञापन और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।


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