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ISSN 2292-9754

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07.15.2014


केदार शोध पीठ, बांदा में वरिष्ठ कवि उद्भ्रांत का एकल काव्यपाठ
चन्द्रपाल कश्यप

बांदा। विगत केदार शोध पीठ न्यास, सिविल लाइन्स बांदा के सभागार में वरिष्ठ कवि उदभ्रांत का एकल काव्यपाठ का आयोजन किया गया जिसमें नगर एवं आसपास के जनपदों के कई रचनाकार उदभ्रांत एवं उनकी कविताओं को सुनने के लिए आये। इस अवसर पर बोलते हुये उदभ्रांत ने केदारजी से जुडे़ हुये कई संस्मरण यहाँ पर सुनाये। केदार जी के जीवन काल में कई बार उदभ्रांत यहाँ आ चुके थे। न्यास की सक्रियताओं की सराहना करते हुये उन्होंने कहा कि हिन्दी में अपने आप में यह अकेला न्यास है, जो किसी अपने रचनाकार को लेकर इतनी शिद्दत के साथ जुड़कर कार्य कर रहा है। न्यास द्वारा केदार जी के अप्रकाशित साहित्य के प्रकाशन के कार्य को भी देखा, जो न्यास द्वारा 10 पुस्तकों के रुप में अब तक प्रकाशित कराया जा चुका है, इसके लिए उन्होंने न्यास के सचिव की सराहना की।

इस अवसर पर उदभ्रांत जी ने अपनी कई चर्चित कविताओं का काव्य पाठ किया जिनमें बकरामंडी, सूअर, घर, पान का बीड़ा, आगरे का पेठा, तवायफ़, आवारा कुत्ते, जोकर, बचपन, आत्महत्या, मोमबत्ती, सीता रसोई, ब्लैकहोल मुख्य रूप से श्रोताओं के द्वारा सराही गईं। इस अवसर पर उदभ्रांत ने हाल में ‘प्रेरणा’, ‘हमारा भारत’ पत्रिका में प्रकाशित उपन्यास ‘नक्सल’ की चर्चा की, इस चर्चित उपन्यास की पृष्ठभूमि पर बात करते हुये उन्होंने यह भी बताया कि यह उनके द्वारा क्यों लिखा गया। उन्होंने नक्सलियों के प्रति सरकारी रवैये की चर्चा की।

इस आयोजन की अध्यक्षता डॉ. रामगोपाल गुप्त ने की और संचालन चन्द्रपाल कश्यप ने किया। आयोजन के अन्त में न्यास के सचिव एवं समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण कवि नरेन्द्र पुण्डरीक ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।

चन्द्रपाल कश्यप,
केदार शोध पीठ, बांदा


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