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ISSN 2292-9754

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07.28.2014


कवि अशोक अंजुम का सम्मान एवं 'चम्बल में सत्संग' का लोकार्पण
विशेष संवाददाता

 

गत दिवस अलीगढ के लोकप्रिय नेता एम.एल.सी श्री विवेक बंसल द्वारा अपने आवास 'अयोध्या कुटी' के विशाल प्रांगण में चर्चित कवि श्री अशोक'अंजुम' तथा पर्सियन की प्रख्यात विदुषी प्रो. अज़रमी दुख़्त सफ़वी का सार्वजनिक अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर अशोक' अंजुम' के नए दोहा संग्रह "चम्बल में सत्संग" का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अलीग़ढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति प्रो. ख़्वाजा शमीम ने की तथा सञ्चालन डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ ने किया। कार्यक्रम में डॉ. प्रेम कुमार, श्री सुरेश कुमार, डॉ. राजेश कुमार, श्री सुरेन्द्र सुकुमार, श्री सुबोधनंदन शर्मा, प्रो. हुमायूँ मुराद, डॉ. तारिक़ मंसूर, डॉ. आरिफ अली खान, श्री विवेक बंसल आदि वक्ताओं ने अपने वक्तव्य में श्री अशोक अंजुम और प्रो. अज़रमी के व्यक्तित्व और कृतित्व की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। ज्ञातव्य है कि पिछले दिनों अशोक 'अंजुम' के पूर्व प्रकाशित दोहा संग्रह 'प्रिया तुम्हारा गाँव' पर एक लाख एक हज़ार रुपए का "नीरज पुरस्कार" प्राप्त हुआ है। श्री अंजुम ने इस अवसर पर कुछ चुनिंदा दोहे भी सुनाए, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा -

"मानवता की देह पर देख-देखकर घाव।
हम कबीर जीते रहे सारी उम्र तनाव।।"
"रात स्वप्न में दोस्तो देखे अज़ब प्रसंग।
संसद में मुजरा हुआ, चम्बल में सत्संग।।

कार्यक्रम में उपस्थित श्री अंजुम की माताजी और पत्नी श्रीमती भारती शर्मा का कई वक्ताओं ने विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सैकड़ों बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।


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