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ISSN 2292-9754

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01.03.2016


सुनील गज्जाणी की नाट्य कृति "किनारे से परे व अन्य नाटक'' को कादम्बरी सम्मान
सुनील गज्जाणी

संस्कारधानी जबलपुर के साहित्यिक संस्थान ''कादम्बरी'' के वर्ष 2015 वार्षिक उत्सव में सुनील गज्जाणी की नाट्य कृति ''किनारे से परे व अन्य नाटक'' को बेनी प्रसाद त्रिवेदी कादम्बरी सम्मान से सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया जिसके अंतर्गत सम्मान पत्र, शॉल, एवं नकद राशि प्रदान की गयी।

\शहीद स्मारक भवन में हुए भव्य समारोह में भिन्न-भिन्न विधाओं के अंतर्गत राष्ट्र के 33 साहित्यकार उनकी कृतियों के लिए सम्मानित किए गए जिसमें नाट्य विधा के अंतर्गत गज्जाणी की नाट्य कृति ''किनारे से परे व अन्य नाटक'' का चयन किया गया।

इस अवसर पर कादम्बरी संस्थान के पदाधिकारी वयोवृद्ध साहित्यकार आचार्य भगवत दुबे ने अपने आशीर्वचन में कहा कि ''नाट्य विधा में लेखन करना एक दुरूह कार्य है और वो भी सिद्धहस्त हो कर करना रचनाकार की कुशल कलम को परिपूर्ण करती है जिसमें सुनील गज्जाणी अपनी नाट्य पुस्तक के माध्यम से एक दम खरे उतरते हैं'।' कार्यक्रम के अध्यक्ष महामंगलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद नन्द जी महाराज एवं विशिष्ठ अतिथि साहित्यकार डॉक्टर राजकुमार तिवारी 'सुमित्र' थे।

ब्लॉगर एवं साहित्यिक संस्थान ''बुनियाद'' के अध्यक्ष सुनील गज्जाणी की इस उपलब्धि पर नगर के रचनाकारों, रंगकर्मियों सहित मधु आचार्या, नीरज दैया, नवनीत पांडे, कमल रंगा, राजेन्द्र पी जोशी, सुधेश व्यास, संजय पुरोहित, संजय आचार्य 'वरुण' हरीश बी शर्मा, रमेश भोजक ''समीर'' राम सहाय हर्ष, नवल किशोरी व्यास, अशोक व्यास इरशाद अज़ीज, अजित राज. आत्मा राम भाटी, राजेश ओझा, नदीम अहमद नदीम, गिरीश पुरोहित, असद अली असद, डॉक्टर कृष्णा आचार्य, बाबू लाल छंगाणी, मुकेश व्यास, नरेंद्र व्यास आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की।

सुनील गज्जाणी की कविता "बड़ी थाली" राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता में प्रथम घोषित

पत्रिका ''भिलाई वाणी'' द्वारा आयोजित राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता के अंतर्गत गज्जाणी की कविता ''बड़ी थाली'' को प्रथम घोषित किया गया है; यह जानकारी पत्रिका के मुख्य संपादक एवं नाटककार, रंगकर्मी एल.रुद्रमूर्ति द्वारा प्रदान की गयी है।

सुनील गज्जाणी को यह पुरस्कार आगामी माह में एक समारोह के तहत भिलाई (रायपुर) में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।

गौरतलब रहे की इसी प्रतियोगिता के अंतर्गत गत वर्ष गज्जाणी की कविता ''मित्र! तुम शहर मत आना'' द्वितीय रही थी।


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