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ISSN 2292-9754

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01.03.2016


सरो सामान (ग़ज़ल संग्रह) का लोकार्पण
संजय कुमार गिरि

 नई दिल्ली - भारतीय विकास समिति एवं अमृत प्रकाशन के तत्वधान में दो पुस्तकों का लोकार्पण उत्सव कल हिंदी भवन नई दिल्ली में आयोजित हुआ। मंच की अध्यक्षता वरिष्ठतम साहित्य विभूति श्री बालस्वरुप राही जी ने की एवं मुख्य अतिथि विश्व विख्यात कवि प्रदीप चौबे रहे। विशिष्ठ अतिथियों में प्रख्यात गज़लकार जनाब मलिकज़ादा "जाबेद", सुप्रसिद्ध साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव एवं प्रवीण शुक्ल (प्रख्यात साहित्यकार) थे। मंच का संचालन मोहतरम शायर उस्ताद मंगल नसीम ने अपने शानदार और लाजबाब अंदाज़ में किया।

सर्वप्रथम मंच पर उपस्थित सभी साहित्य मनीषियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर माँ शारदे की आराधना की। जगदीश भरद्वाज ने अपने मधुर स्वर में रामश्याम हसीन की कुछ ग़ज़लों का गायन बहुत ही लाजबाब संगीतबद्ध तरीके से किया, वहाँ उपस्थित सभी श्रोता झूम उठे -

"शायरी के इस सरो-सामान का
नाम कुछ रख दो मेरे दीवान का
लाख समझाता हूँ, इक सुनता नहीं
क्या करूँ मैं इस दिले नादान का"

उस्ताद शायर मंगल नसीम ने रेखा रोहतगी द्वारा लिखी किताब हाईगा वीथी पर प्रकाश डालते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि अभी तक भारत ने हिंदी साहित्य में अनेकों महत्वपूर्ण कृतियाँ प्रदान की हैं एवं अनेकों विधियों में तो अनेकों किताबें प्रकाशित हुई हैं किन्तु हाईगा वीथी में अभी तक कोई कृति देखने को नहीं मिली। भारत में सर्व प्रथम हाईगा वीथी में प्रकाशित कृति को प्रकाशित कराने का श्रेय निश्चित ही सुश्री रेखा रोहतगी जी को जाता है। सुश्री पूनम माटिया ने भी रेखा जी की पुस्तक हाईगा वीथी पर प्रकाश डाला एवं उनके लिख कुछ हाईकू पढ़े। दूसरी किताब "सरो सामान" युवा ग़ज़लकार रामश्याम "हसीन" द्वारा उनकी 40 ग़ज़लों का संग्रह है यह अमृत प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। शब्दों से खेलने वाले शब्दों के जादूगर साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव ने रामश्याम "हसीन" को अपना आशीर्वाद देते हुए राम श्याम हसीन नाम का सुन्दर विश्लेषण किया। वहीँ विश्व विख्यात कवि प्रदीप चौबे ने युवा पीढ़ी को ग़ज़ल का महत्व बताते हुए अनेकों उदहारण दिए। कवि प्रवीन शुक्ल ने रामश्याम हसीन के ग़ज़ल संग्रह पर अपने वक्तव्य में कहा कि हसीन साहब ने अपनी ग़ज़लों में अनेकों मुहावरों का सुन्दर प्रयोग किया है। मलिकज़ादा "जाबेद" एवं अध्यक्ष वरिष्ठतम साहित्य विभूति श्री बालस्वरुप राही जी ने भी अपना आशीष रामश्याम हसीन को दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित अनेकों साहित्यकारों कवियों में राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष जगदीश मित्तल, प्रेक्षा के संपादक श्री जगदीश ठकराल जी सहित इस अवसर पर उनका मनोबल बढ़ाने पहुँचे दिल्ली, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के अपने असंख्य कवि में सर्वश्री जय सिंह आर्य, पीके आज़ाद, रामकिशोर उपाध्याय, राजेश तंवर, असलम बेताब, संजय कुमार गिरि, निर्देश शर्मा ,ओम प्रकाश शुक्ल, कमला जीनत, कीर्ति सिंह, देव नागर, ओम प्रकाश प्रजापति, अशोक प्रजापति, राजेंदर प्रजापति, रवि वर्मा, मनोज भावुक, जितेन्द्र प्रीतम, यूनुस सिद्दीकी, रंजना अग्रवाल, उर्मिला माधव, शुभदा वाजपेयी, नेहा नाहटा, निवेदिता मिश्र झा, चन्द्रकला सियाल और प्रियंका राय ओमनन्दिनी, आशीष सिन्हा, दीपक गोस्वामी, जयपुर से आये बज कुमार बनज। कार्यक्रम के अंत में मंचासीन अतिथियों व आयोजन में सहयोगी रहे विशिष्ट लोगों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।


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