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ISSN 2292-9754

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02.06.2017


राजमहेंद्रवरम में प्रो. ऋषभदेव शर्मा का षष्ठिपूर्ति समारोह संपन्न
डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा


चित्र परिचय – 1. शहनाई के साथ कल्याण मंडपम की ओर प्रस्थान, 2. गणेश वंदना : कुचिपुड़ी नृत्य,
3. डॉ. ऋषभदेव शर्मा और डॉ. पूर्णिमा शर्मा : आसन पर, 4. प्रो. देवराज समीक्षात्मक उद्धरणों की दीवार का उद्घाटन करते हुए, 5. डॉ. भागवतुल हेमलता कविता-पोस्टरों का उद्घाटन करते हुए, 6. वरमाला का आदान-प्रदान, 7. ‘रामभक्ति काव्य का लोक पक्ष’ का समर्पण, 8. प्रो. देवराज का स्वागत-सत्कार, 9. कुमार लव की काव्यकृति का समर्पण, 10. ‘तेलुगु साहित्य : एक अंतर्यात्रा’ प्रो. ऋषभदेव शर्मा को समर्पित, 11. प्रो. देवराज का अध्यक्षीय संबोधन, 12. प्रो. देवराज द्वारा प्रो. ऋषभदेव शर्मा की पुस्तक ‘कथाकारों की दुनिया’ का लोकार्पण.

राजमहेंद्रवरम, 6 फरवरी 2017 - यहाँ आदित्य डिग्री कॉलेज, राजमहेंद्रवरम के सभाकक्ष में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के अधिष्ठाता प्रो. देवराज की अध्यक्षता में प्रतिष्ठित तेवरीकार, कवि, समीक्षक, हिंदीसेवी एवं शोध निर्देशक प्रो. ऋषभदेव शर्मा के षष्ठिपूर्ति समारोह का आयोजन भव्यतापूर्वक संपन्न हुआ। समारोह का संयोजन डॉ. पोलवरपु जयलक्ष्मी और डॉ. सिरिपुरपु तुलसी देवी ने किया। दक्षिण भारत में यह परंपरा है कि परिवार के वरिष्ठ जन अथवा गुरुजन की साठवीं वर्षगाँठ पर विशिष्ट समारोह करके उनके सुखद भविष्य की कामना की जाती है। इसके अंतर्गत सम्मानित वरिष्ठ जन का ‘कल्याणम’ और ‘कनकाभिषेकम’ करते हुए उनसे संबंधित स्मृतियों का बखान किया जाता है। इसी रीति के अनुसार प्रो. ऋषभदेव शर्मा और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शर्मा का वैदिक विधि-विधान से ‘कल्याणम’ (विवाह) संपन्न कराया गया जिसके उपरांत उनके परिवारी जन के साथ संपूर्ण दक्षिण भारत के विविध अंचलों से आए हुए पूर्व छात्रों और शोधार्थियों ने उनका अभिनंदन किया। वाणीश्री के कुचिपुड़ी नृत्य तथा मोहम्मद आबिद की संगीतमय प्रस्तुतियों के अलावा डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा और प्रवीण प्रणव द्वारा निर्मित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। कुल 38 मिनट की इस लघुफिल्म में प्रो. शर्मा के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व की रोचक अवं अंतरंग झाँकी प्रस्तुत की गई।

षष्ठिपूर्ति समारोह के द्वितीय सत्र में प्रो. ऋषभदेव शर्मा की विभिन्न काव्यकृतियों और समीक्षा पुस्तकों के उद्धरणों की पोस्टर-प्रदर्शनी भी तीन दीवारों पर प्रदर्शित की गई जिनका उद्घाटन प्रो. देवराज के साथ जयदीप मुखर्जी और डॉ. भाग्वतुल हेमलता ने अलग-अलग भाषाओं में हस्ताक्षर करके किया।

तृतीय सत्र में प्रो. ऋषभदेव शर्मा की सद्यः प्रकाशित पुस्तक “कथाकारों की दुनिया” लोकार्पित की गई। साथ ही उन्हें समर्पित तीन अन्य ग्रंथों को भी लोकार्पित किया गया जिनमें डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा की साहित्य-इतिहास की पुस्तक “तेलुगु साहित्य : एक अंतर्यात्रा”, उत्तरआधुनिकतावादी कवि कुमार लव का कविता संग्रह “गर्भ में”, तथा पटना, बिहार, की लेखिका डॉ. चंदन कुमारी का समीक्षाग्रंथ “राम भक्ति काव्य का लोकपक्ष” समिलित हैं।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. देवराज ने कहा कि दक्षिण भारत आधुनिकता और परंपरा को एक साथ साध कर चलनेवाला सांस्कृतिक क्षेत्र है और यहाँ के हिंदी विद्वानों तथा छात्रों द्वारा जिस पारिवारिक आत्मीयता के साथ ऋषभदेव शर्मा की षष्ठिपूर्ति का उत्सव मनाया जा रहा है, वह आधुनिक समय में गुरु-शिष्य संबंध की अनुकरणीय मिसाल है। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।




प्रस्तुति –

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा,
सह-संपादक : स्रवंति,
प्राध्यापक, उ शि शो संस्थान,
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा,
हैदराबाद- 500 004.



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