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ISSN 2292-9754

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10.29.2014


नीरजा द्विवेदी के संस्मरण एवं महेश चंद्र द्विवेदी के व्यंग्य संग्रह का लोकार्पण
महेश चंद्र द्विवेदी

 
महेश चन्द्र द्विवेदी के व्यंग्य संग्र्ह "वीरप्पन की मूँछें" एवं नीरजा द्विवेदी की पुस्तक "स्विट्ज़रलैंड के वे 21 दिन" का लोकार्पण – श्री टी.एन. चतुर्वेदी (भूतपूर्व राज्यपाल), श्री के. विक्रम राओ
एवं श्री गोपाल चतुर्वेदी

‘ज्ञान प्रसार संस्थान’ के तत्वावधान मेँ सिटी मौंटेसरी स्कूल, गोमतीनगर के सभागार मेँ लेखिका नीरजा द्विवेदी के विदेश प्रवास के संस्मरण “स्विट्ज़रर्लैंड के वे 21 दिन” एवं लेखक महेश चंद्र द्विवेदी के व्यंग्य संग्रह “वीरप्पन की मूँछेँ” का लोकार्पण समारोह सम्पन्न हुआ. समारोह की अध्यक्षता सुख्यात पत्रकार के. विक्रम राव ने की एवं मुख्य अतिथि थे श्री टी. एन. चतुर्वेदी, पूर्व-राज्यपाल एवं प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री गोपाल चतुर्वेदी। डॉ. उषा सिन्हा ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया।

नीरजा द्विवेदी द्वारा सस्वर सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने के उपरांत दोनों नवप्रकाशित पुस्तकों को मंचस्थ विद्वत्जनो ने लोकार्पित किया। नीरजा द्विवेदी ने संस्मरण के एक रोचक अंश ‘सूज़न के यहाँ डिनर’ का पाठ किया। महेश चंद्र द्विवेदी ने समस्त अतिथियोँ का स्वागत अपने व्यंग्यात्मक ढंग मेँ इस प्रकार किया, ‘वीरप्पन की मूँछोँ’ के लोकार्पण समारोह मेँ आप द्वारा पधारने का साहस दिखाने पर मैँ अभिभूत हूँ’ और फिर ‘अखाड़ा और अखाड़ेबाज़ी’ शीर्षक व्यंग्य पढ़कर समाज मेँ व्याप्त अंधविश्वासोँ एवं पाखंडोँ पर गहरी चोट की।

पूर्व न्यायाधीश राम चंद्र शुक्ल ने अपनी समीक्षा मेँ कहा, “नीरजा द्विवेदी द्वारा विरचित ‘स्विट्ज़रलैंड के वे 21 दिन’, लौकिक जीवन की अलौकिक कथाओँ का सार संग्रह है।” डॉ. वेद प्रकाश आर्य ने महेश चंद्र द्विवेदी के व्यंग्योँ को सार्वभौमिक, प्रासंगिक एवं प्रभावोत्पादक बताया। मुख्य अतिथि गोपाल चतुर्वेदी एवं अध्यक्ष के. विक्रम राव ने भी दोनोँ पुस्तकोँ की प्रशंसा की एवं उन्हेँ ज्ञानवर्धक, पठनीय एवम रोचक बताया।

नीरजा द्विवेदी के धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत सभा समाप्त हुई।  


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