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ISSN 2292-9754

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09.13.2014


खुला मंच..यात्री का एक नया प्रयास
देवमणि पांडेय


चित्र (बाएँ से दाएँ): यात्री रंग समूह के खुला मंच़ कार्यक्रम में कवि संतोष कुमार झा, फ़िल्म निर्देशक अदीप चंदन, अभिनेत्री दिव्या जगदले, रंगकर्मी पॉरमिता चटर्जी, रंगकर्मी अशोक शर्मा, संगीतकार कुलदीप सिंह, रंगकर्मी ओम कटारे, शायर देवमणि पांडेय और कवि पुनीत कुमार पांडेय (मुम्बई 6 सितम्बर 2014)

शनिवार 6 सितम्बर को अँधेरी पूर्व स्थित रेलवे कालोनी के वेल्फेयर हॅाल में रंग संस्था यात्री थिएटर द्वारा "खुला मंच" शीर्षक से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें यात्री और करीब 12 अन्य कलाकारों और लेखकों ने अपनी कला की प्रस्तुति की। खुला मंच-के औपचारिक शुभारंभ में संगीतकार कुलदीप सिंह, रंगमंच की कलाकार दिव्या जगदले ने दीप प्रज्ज्वलित किया। शायर देवमणि पांडेय, कवि पुनीत पांडेय और कवि संतोष कुमार झा इस अवसर पर ख़ास मेहमान थे, जिन्होंने अपनी कविताओं का पाठ किया । उसके बाद यात्री के कलाकार धर्मेन्द्र ने अशोक चक्रधर की कविता तमाशा को नाटकीय भाव भंगिमाओं के साथ प्रस्तुत किया। यात्री के ही रंगकर्मी आनंद पाण्डेय की हरिशंकर परशाई की कहानी "मैं नरक से बोल रहा हूँ" की प्रस्तुति ने इस गंभीरता को और ऊँचाई दी। जिसका स्वागत दर्शकों ने ताली बजा कर किया। रंगकर्मी राकेश की हास्य कविता मेरी आँख चल गई ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी अशोक शर्मा और रंगकर्मी परोमिता चटर्जी नें किया। कार्यक्रम के आयोजक और रंग समूह यात्री के अध्यक्ष श्री ओम कटारे ने खुला मंच के आयोजन के बारे में बताते हुए कि नए कलाकारों, रचनाकारों, गायकों और संगीतकारों के लिए ये मंच टॉनिक का काम करेगा जिन्हें अपनी कला प्रस्तुति के लिए मंच नहीं मिलता। ये कार्यक्रम हर महीने के पहले शनिवार को आयोजित किया जाएगा। खुला मंच की सफलता का अन्दाज़ इसी से लगाया जा सकता है कि पूरा हाल भरा हुआ था और दर्शक पीछे खड़े होकर कार्यक्रम का आनंद ले रहे थे।




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