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ISSN 2292-9754

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11.03.2016


"काव्यांकुर-4" काव्य संध्या एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह 2016
संजय कुमार गिरि

नई दिल्ली-

कल शाम नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटैट सेंटर के अमलतास सभागार में नवांकुर साहित्य सभा द्वारा 16 नवांकुर कवियों द्वारा सृजित कविता संग्रह "काव्यांकुर-4" पुस्तक के विमोचन एवं काव्य संध्या का सुन्दर आयोजन किया। संस्था के अध्यक्ष अशोक कश्यप एवं महासचिव काली शंकर सौम्य द्वाया आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार एवं ग़ज़लकार श्री बालस्वरूप राही जी थे एवं अति विशिष्ठ अतिथियों में साहित्यकार एवं कवि डॉ. बी.एल. गौड़ और हास्य-व्यंग्य की प्रसिद्ध मंचीय कवियत्री डॉ. सरोजनी प्रीतम जी थीं। विशिष्ठ अतिथियों में गीतकार एवं फ़िल्मकार सर्वश्री प्रदीप जैन, कवि एवं साहित्यकार नरेश मालिक, कवि एवं साहित्यकार हर्षवर्धन आर्या, कवि समोद सिंह चिचोरा एवं कवि एवं समाज सेवक दुर्गा प्रसाद वर्मा "अकेला" की विशेष उपस्थति रही। इस सुअवसर पर नवांकुर साहित्य सभा के मुख्य संरक्षक एवं मंचीय कवि श्री रसिक गुप्ता जी ने भी अपनी उपस्थति दर्ज करायी, अपना शानदार काव्य पाठ भी किया और अपनी शुभकामनाएँ सभी नवांकुर कवियों को दीं!

"काव्यांकुर-4" में जिन 16 नवांकुर कवियों की रचनाएँ प्रकाशित की गई हैं वे इस प्रकार हैं - सुशीला शिवराण, संध्या प्रहलाद, रणजीत तनहा, कल्पना पांडये, ओम प्रकाश शुक्ल, मनस्विनी मुकुल, पूजा तिवारी, ओमवीर करन आकाश अग्रवाल, अजय "अज्ञात" रेनू सिरोया, रिंकज यादव, अमित अम्ब्रष्ट, डॉ. प्रशांत देव, मनीष कुमार और संजय कुमार गिरि।

सभी चयनित कवियों को आगंतुक साहित्यकारों द्वारा स्मृत्ति चिन्ह एवं सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस सुअवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ठ अतिथियों ने भी अपनी रचनाएँ पढ़ीं एवं नवांकुर कवियों को पुस्तक काव्यांकुर-4 के लिए अपनी अपनी शुभकामनाएँ भी दीं।

सभी कवियों ने बहुत ही शानदार काव्य पाठ किया जिसे वहाँ उपस्थित श्रोताओं ने बहुत सराहा। संस्था के महसचिव काली शंकर सौम्य ने एक सुन्दर कुण्डलिया छन्द पढ़कर सुनाया जिस पर सभी श्रोताओं ने ताली बजा कर उनका अभिवादन किया

काव्यांकुर की श्रृंखला, यह चौथा सोपान।
चलीं नवेली लेखनी, सजे नवल अरमान।।
सजे नवल अरमान, भाव की मृदु बरसातें।
सोलह रचनाकार, कर रहे मन की बातें।।
कहें 'सौम्य' है हुई, प्रफुल्लित कलिका उर की।
सौंप आपको आज, सर्जना काव्यांकुर की।।

सुशीला शिवराण के सुन्दर दोहों को श्रोताओं ने बहुत सराहा --

मातम में है चूड़ियाँ, बिलखे हैं सिन्दूर!
विधवा कहे शहीद की जीता रह ओ शूर!!

कवियत्री संध्या प्रहलाद ने अपनी सुन्दर कविता में कहा कि -

नारी हूँ कितना भी उजाड़ो
हरे होने की कला जानती हूँ

--जिस पर सभी श्रोताओं ने वाह-वाही की। रणजीत तनहा कल्पना पांडये, ओम प्रकाश शुक्ल ने भी अपना बहुत सुन्दर काव्य पाठ किया। अजय "अज्ञात" की ग़ज़ल के लाजबाब अशआर सुन कर सभी उपस्थित श्रोताओं ने उन्हें खूब सराहा -

वो मेरे होंसलों को आज़माना चाहता है
परों में बाँधकर पत्थर उड़ाना चाहता है

इसी तरह, पूजा तिवारी, की सशक्त रचना को लो्गों ने ख़ूब सराहा। दिल्ली पुलिस में कार्यरत रिंकज यादव ने भी अपनी हास्य रचना पढ़ी। हाजीपुर बिहार से आये कवि अमित अम्ब्रष्ट ने भी अपनी रचना के माध्यम से कवियों को सन्देश देते हुए कहा कि -

मत छोड़ना लिखना तुम गर सूखने लगे स्याही
बूँद दर बूँद जिस्म के रक्त को और लिखना कोई
कोमल गीत क्योंकि जब कारखाने में बनने लगेंगे,

एटा से आये कवि डॉ. प्रशांत देव ने अपना लिखा एक मधुर गीत पढ़ा जिसे सुन कर सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए और अंत में दिल्ली के कवि एवं पत्रकार संजय कुमार गिरि ने अपने शानदार देश प्रेम से ओत-प्रोत मुक्तक एवं गीतिका भी पढ़ी, सभी कवियों की रचनाओं को साहित्यकार एवं ग़ज़लकार श्री बालस्वरूप राही ने ख़ूब सराहा एवं भूरि भूरि प्रशंसा भी की!

सरस्वती वंदना मंच के अध्यक्ष अशोक कश्यप ने अपने मधुर कंठ से की और महात्मा गाँधी जी को समर्पित गीत सुनाया। मंच का शानदार संचालन नरेंदर सिंह निहार ने किया। सैमसन, शशिकांत, लोह कुमार, मनोज यादव तथा अभिनव कश्यप ने कार्यक्रम की सारी व्यवस्था देखी। संस्था के कोषाध्यक्ष मो. इमरान अंसारी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में पिछले सभी काव्य संग्रह (काव्यान्कुर) में चयनित एवं सम्मानित रचनाकारों द्वारा नए रचनाकारों का स्वागत अंग वस्त्र एवं बेज लगाकर स्वागत किया गया। जो नवांकुर साहित्य सभा की एक नई पहल रही।


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