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08.31.2008
 

हरनोट की कहानी बिल्लियाँ बतियाती है कालजयी कहानियों
में शामिल


              

एस आर हरनोट की बहुचर्चित कहानी बिल्लियाँ बतियाती है हिन्दी की कालजयी कहानियों में शामिल की गई है। हिन्दी की कालजयी कहानियाँका पांच खंडों में साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रकाशन किया जा रहा है जिसका संपादन प्रख्यात लेखक स्व. कमलेश्वर ने किया है। उन्होंने इस कहानी का चयन अकादेमी की इस महत्वपूर्ण व वृहद् योजना के लिए किया था। यह सूचना साहित्य अकादेमी के उप सचिव श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने हरनोट को पत्र लिख कर दी है।

बिल्लियाँ बतियाती है कहानी कुछ सालों पहले प्रसिद्ध पत्रिका पहल में प्रकाशित हुई थी और छपते ही यह बेहद चर्चित हुई। कमलेश्वर के शब्दों में बिल्लियाँ बतियाती है कहानी अद्भुत कहानी है जो एक ताजा अंदाज, कथ्य का नया कोण और सहजता लिए हुए हैं। प्रख्यात आलोचक डॉ० नामवर सिंह ने भी दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में इस कहानी की प्रशंसा की थी। अनेक लेखकों, आलोचकों और पाठकों ने हरनोट की इस कहानी को सराहा है। युवा आलोचक गौतम सान्याल ने इस कहानी पर एक लम्बा लेख लिखा था जिसके कुछ अंश मुम्बई से प्रकाशित होने वाली हिन्दी की पत्रिका हिमाचल मित्रके अगामी अंक में प्रकाशित किए जा रहे हैं और साथ ही इस कहानी को प्रमुखता से पुनः प्रकाशित किया जा रहा है। इन्टरनेट की प्रमुख हिन्दी वेबजीन हिन्दीनेस्टपर भी यह कहानी प्रकाशित की गई है। जब हरनोट का बहुचर्चित कहानी संग्रह दारोश और अन्य कहानियाँ प्रकाशित हुआ तो उसमें यह पहली कहानी है। इस संग्रह पर हरनोट को अन्तरराष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मानजब लंदन में मिला तो इस कहानी का लंदन के नेहरू सेन्टर में समारोह के दिन मंचन भी किया गया था। इस कहानी का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है। 


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