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| 01.20.2008 |
| साहित्य कुंज से निष्कासित लेखिका - स्नेह ठाकुर |
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टोरोंटो सितम्बर २५,२००७ - हमें खेद है कि टोरोंटो की लेखिका स्नेह ठाकुर को साहित्य कुंज से निष्कासित करने का निर्णय लेना पड़ रहा है। साहित्य कुंज के पाँच वर्ष के जीवन में यह सबसे दुखद निर्णय है।
दक्षिणी ओंटेरियो (कैनेडा) में स्नेह ठाकुर का नाम जाना पहचाना रहा है। यहाँ का साहित्य समाज एक सीमित परिवार की तरह है और सभी एक दूसरे को जानते पहचानते हैं। स्नेह ठाकुर के व्यक्तित्व से भी सभी परिचित हैं। और अभी तक सभी उस व्यक्तित्व को किसी तरह से सहन कर रहे थे। पर २२ सितम्बर को हैमिल्टन के हिन्दू समाज मन्दिर में हुए कवि सम्मेलन में स्नेह ठाकुर भद्रता की सभी सीमाएँ लाँघ गईं और स्नेह ठाकुर के पति कवि सम्मेलन में हाथा-पाई पर उतर आए। समय सीमित होने के कारण श्याम त्रिपाठी जी जो कि सम्मेलन के संचालक थे, ने कवियों को निवेदन किया कि मंच का उपयोग केवल काव्य पाठ के लिए ही करें - कोई व्यक्तव्य न दें। स्नेह ठाकुर को जब मंच पर बुलाया गया तो उसने अपनी न्यूयॉर्क यात्रा और तथाकथित सम्मान का ब्यौरा देना आरम्भ कर दिया और यह भी कहा कि वह यह मन्दिर की कार्यकारिणी के कहने पर कर रहीं हैं। मन्दिर के प्रतिनिधियों ने तुरन्त स्नेह ठाकुर को चुनौती देते हुए कहा कि मन्दिर ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है। तब स्नेह ने अध्यक्षा रमणीका जी के ऊपर बात डालते हुए कहा कि वह ऐसा रमणीका जी के कहने पर कर रही हैं। रमणीका जी ने भी माईक पर इस बात को नकार दिया। अब स्नेह ठाकुर के पास मंच से उतरने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा था। उनका ग्रुप एक कोने में बैठ मंत्रणा करता रहा। जैसे तैसे कवि सम्मेलन समाप्त हुआ ( स्नेह ठाकुर को पुनः काव्य पाठ के लिए बुलाया गया और उसने किया भी)। एकान्त पाते ही स्नेह ठाकुर के पति ने श्याम त्रिपाठी जी के ऊपर आघात किया। छाती पर घूँसे का प्रहार किया। दो थप्पड़ मारने के बाद गर्दन से पकड़ कर अश्लील गालियाँ भी बकीं। लोगों ने बीच बचाव करके छुड़वाया। लज्जाजनक बात है कि इतना कुछ होने के बाद भी मन्दिर की कार्यकारिणी ने न तो पुलिस को बुलाने दिया और न ही ठाकुर को क्षमायाचना करने के लिए कहा। यह साहित्य समाज का दायित्व है कि ऐसी गुण्डागर्दी को सहन न किया जाए। यहाँ के साहित्यिक समाज में स्नेह ठाकुर का बहिष्कार तो होगा ही पर इस समय मैं उसे साहित्य कुंज से निष्कासित करने का निर्णय ले रहा हूँ। मुझे तो बस अचम्भा आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की चयन सिमिति पर हो रहा है जिसने इस प्रतिभाहीन अशिष्ट लेखिका को कैनेडा के प्रतिनिधि के रूप में आमन्त्रित किया। हो सकता है की भारतीय तन्त्र का भाई-भतीजावाद ही इसका मुख्य कारण रहा हो। -- सुमन कुमार घई |
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