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06.15.2008
 

कवि सम्मेलन - पहली बार हिन्दू सभा मन्दिर, ब्रैम्पटन में


२७ जनवरी, २००७ - ब्रैम्पटन, पहली बार हिन्दू सभा मन्दिर ब्रैम्पटन के सभागार में काव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि थे हिन्दू सभा मन्दिर के पं। अभय शास्त्री। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. शैलजा सक्सेना ने की और सह-अध्यक्ष के रूप में श्री मोहन माँगो (वाइस-प्रेज़िडेण्ट- हिन्दू सभा मन्दिर, ब्रैम्पटन) उपस्थित थे। डॉ. शैलजा सक्सेना न केवल कैनेडा की प्रसिद्ध साहित्यकार हैं बल्कि उनके द्वारा लिखा गया साहित्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ है।

कार्यक्रम दोपहर के २:०० बजे आरम्भ होना निश्चित हुआ था परन्तु मौसम की खराबी के कारण थोड़ी देर से आरम्भ हुआ। श्रीमती भुवनेश्वरी पाण्डे ने, जिन्होंने इस कार्यक्रम का संयोजन किया था, मुख्य अतिथि (पं. अभय शास्त्री), अध्यक्षा (डॉ. शैलजा सक्सेना) और सह-अध्यक्ष (श्री मोहन माँगो) को मंच पर आमन्त्रित करते हुए श्रोताओं का स्वागत किया। उन्होंने इस अवसर पर मन्दिर की कार्यकारिणी को यह अवसर प्रदान करने के लिये धन्यवाद दिया। दीप प्रज्ज्वलन के लिये श्रीमती जास्मीन सावंत को आमन्त्रित किया गया। श्रीमती रचना मेहरा ने राग दरबारी में सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। यह सरस्वती वन्दना की रचना स्वयं श्रीमती भुवनेश्वरी पाण्डे की ही थी। सरस्वती वन्दना के पश्चात श्रीमती प्रतीक्षा पारिख ने कृष्ण कथा पर एक नृत्य प्रस्तुत किया जो कि दर्शकों द्वारा विशेष रूप से सराहा गया। इस तरह से शास्त्रीय गायन व नृत्य के पश्चात सभागार का वातावरण पूर्ण रूप से साहित्यिक हो चुका था। सभा को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि पं. अभय शास्त्री ने हिन्दी काव्य इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वास्तव में सर्वप्रथम कवि महर्षि अंगिरा हैं जिन्होंने ऋगवेद की ऋचाओं की रचना की। वाल्मिकी को संस्कृत का पहला कवि माना जाता है। मन्दिर की ओर से हिन्दू सभा मन्दिर, ब्रैम्पटन के प्रेज़िडैण्ट बघड़िया जी ने सभी का स्वागत किया और समाज में कवि और कविता के स्थान के महत्व पर जोर दिया।

श्री समीर लाल 'समीर' - काव्यपाठ

अगला चरण मुख्य कार्यक्रम - कवि सम्मेलन का था। इसमें भाग लेने वाले कवियों के नाम इस प्रकार हैं- श्रीमती राज शर्मा, श्री राकेश तिवारी, श्री सरन घई, श्रीमती किरन, श्री पाराशर गौड़, श्रीमती स्नेह ठाकुर, श्री सुरेन्द्र पाठक, श्रीमती सरोजिनी जौहर, श्रीमती इन्दु शर्मा, श्री गुरुदत्त, श्री विजय विक्रान्त, श्रीमती लता पाण्डे, श्री निर्मल सिद्धू, श्री समीर लाल, श्रीमती मीना चोपड़ा, श्री सुमन कुमार घई, डॉ. रत्नाकर नराले, डॉ. शैलजा सक्सेना और श्रीमती भुवनेश्वरी पाण्डे।

सभी रचनाएँ सामयिक थीं और श्रोताओं द्वारा भरपूर सराही गयीं। इस बार के कवि सम्मेलन मंर जाने पहचाने वाले चेहरों में कुछ नये लोग भी दिखे, जैसे कि - श्रीमती किरन, श्रीमती मीना चोपड़ा और श्री समीर लाल। तीनों की कविताओं का नयापन सभी को अच्छा लगा। श्रीमती इन्दु शर्मा की स्वरमयी कविता और हास्य कविता- 911 श्रोताओं को मोह लिया। श्री समीर लाल की कविता में ताली की महत्ता की चर्चा थी और लोगों ने भी खूब तालियाँ बजा कर उनका अभिनन्दन किया। श्रीमती किरन और श्रीमती मीना चोपड़ा की कविताओं में भावों की बहुत गहराई थी। श्रीमती राज शर्मा की कविता प्रतीज्ञाआज के नवयुवकों की देशभक्ति और श्री राकेश तिवारी की कविता स्वाधीन में वास्तिविक स्वाधीनता को तौला गया था। श्री सरन घई की पुरस्कृत कविता जनवर बहुत ही सामयिक थी। श्री पाराशर गौड़ की कविता आपस की बात में दाम्पत्य नोंक-झोंक का दर्शन था। श्रीमती स्नेह ठाकुर और श्री गुरुदत्त की कविताओं में देशभक्ति का भाव था। श्रीमती सरोजिनी जौहर ने लक्ष्य प्राप्ति या यश प्राप्तिपर प्रश्न उठाया तो श्री विजय विक्रान्त ने रिश्ते-नातोंकी बात की। श्रीमती लता पाण्डे की कविता एक बूँद करुणामयी सदा की तरह ही भाव प्रधान थी। श्री निर्मल सिद्धू ने भगवान द्वारा सृष्टि-सृजन को एक स्वेटर की बुनाई की तरह प्रकट किया और उनकी ग़ज़ल को भी श्रोताओं ने खूब सराहा। श्री सुमन कुमार की कविता हिमपात, मैं और कफ़्नभी जीवन की निरन्तरता की ओर इशारा करती थी। डॉ. रत्नाकर नराले जो कि न केवल संस्कृत के विद्वान हैं बल्कि आजकल छोटे बच्चों को हिन्दी भी पढ़ाते हैं। उन्होंने अहिन्दी भाषियों के हिन्दी शिक्षण पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं। उन्होंने ऐसी एक पुस्तक में से बच्चों के लिखी गई छोटी-छोटी कई कविताएँ सुनाईं और अपने काव्य पाठ का अन्त एक संस्कृत में रचे भजन के हिन्दी अनुवाद के गायन से किया। चर्चित साहित्यकार डॉ. शैलजा सक्सेना की कविता सदा की तरह साहित्यिक रूप से बहुत ही अच्छे स्तर की थी। उन्होंने कार्यक्रम की संचालिका और संयोजिका श्रीमती भुवनेश्वरी पाण्डे को काव्यपाठ के लिये आमन्त्रित किया। श्रीमती भुवनेश्वरी जी के पाठ के पश्चात धन्यवाद ज्ञापन मन्दिर के वाइस-प्रेज़िडेण्ट श्री मोहन माँगो ने किया। मन्दिर की कार्यकारिणी की ओर से सभी कवियों और कलाकारों को फूलों से श्रीमती माँगो और मन्दिर की प्रोग्राम डाइरेक्टर श्रीमती अनुराधा शर्मा ने अभिनन्दित किया गया। इस काव्यमयी संध्या का अन्त स्वादिष्ट भोजन द्वारा हुआ जो कि हिन्दू सभा मन्दिर की ओर से था। सभागार की साज सज्जा के लिये ब्रैम्पटन हिन्दू सभा मन्दिर के हिन्दी स्कूल के विद्यार्थियों के सभी कवि और कवयित्रियाँ आभारी हैं।


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