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ISSN 2292-9754

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08.06.2014


ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउंडेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह
सुमन कुमार घई


बायें से - अभिनव शुक्ल, विवेक आदेश और उनकी धर्मपत्नी, महेश कटारे, सुरेखा त्रिपाठी, सुदर्शन प्रियदर्शिनी, सुधा ओम ढींगरा, श्याम त्रिपाठी और रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

२६ जुलाई, २०१४, टोरोंटो (कैनेडा) – आज टोरोंटो में स्कारबरो सिविक सेंटर, के काउंसिल चैम्बर्स में पहला ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउंडेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह धूमधाम से सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का आरम्भ हिन्दी चेतना के प्रकाशक और मुख्य संपादक श्री श्याम त्रिपाठी के पुत्र शालिन त्रिपाठी ने दर्शकों और अतिथियों का स्वागत करते हुए किया। भारत और कैनेडा के राष्ट्रीय गानों के पश्चात उपस्थित राजनीतिज्ञों ने सभा को संबोधित किया जिनमें पहले ओंटेरियो विधान सभा के स्पीकर बालकिसून थे। उन्होंने अपने भारतीय मूल की बात करते हुए बताया कि ट्रिनीडाड में पीढ़ी दर पीढ़ी रहते हुए भारतीयों की मातृभाषा खो गई। उन्हें खेद था कि भारतीय मूल के होते हुए भी वह हिन्दी समझ और बोल नहीं पाते। काउंसिलर रेमंड चो ने बधाई देते हुए बताया कि वह श्याम त्रिपाठी जी को पिछले पैंतीस वर्षों से जानते हैं। ओंटेरियो सरकार की एसोशिएट फ़ायनैन्स मंत्री मिट्ज़ी हंटर ने भी अपने उद्बोधन में बधाई दी। कार्यक्रम के मुख्य अथिति टोरोंटो के भारतीय काउंसिल जनरल अखिलेश मिश्रा जी व्यस्तता के कारण देर से पहुँचे। उन्होंने शुद्ध हिन्दी में भाषा के महत्व पर बल देते हुए हिन्दी चेतना की टीम को बधाई दी।

अगले चरण के संचालन का दायित्व पंकज सुबीर ने संभाला। पंकज जो स्वयं लेखक और प्रकाशक हैं, ने इस पुरस्कार स्थापना की प्रशंसा की। उन्होंने सम्मानित होने वाले तीनों साहित्यकारों का संक्षिप्त परिचय दिया।

समग्र साहित्य अवदान के लिए प्रो. हरिशंकर आदेश जी को सम्मानित किया गया। वह अस्वस्थ होने के कारण स्वयं तो उपस्थित नहीं हो पाए परन्तु उनके सपुत्र विवेक आदेश और पुत्रवधु ने सम्मान स्वीकार किया। इस अवसर पर आदेश जी ने विशेष रूप से अपने दो कवितामय संदेश भेजे थे जो उनकी पुत्रवधु ने पढ़े।

भारत के लेखक श्री महेश कटारे को अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान से उनके उपन्यास "कामिनी काय कांतारे" हेतु सम्मानित किया गया। उन्होंने हिन्दी चेतना के उत्कृष्ट प्रकाशन के बारे में कहा कि भारत का यह किसान, भारत के एक गाँव में बैठा कैनेडा से प्रकाशित होने वाली साहित्यिक पत्रिका हिन्दी चेतना पढ़ता है। उन्होंने कहा कि यह समाहारी चेतना सर्वभाषीय चेतना है।

श्रीमती सुदर्शन प्रियदर्शिनी को भी अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान से उनके कहानी संग्रह "उत्तारायण" के लिए सम्मानित किया गया। सुदर्शन जी ने अपनी भाषा में लेखन के महत्व को समझाते हुए कहा कि अन्य भाषाओं में हम अपने भावों को पूरी तरह से व्यक्त करने में असमर्थ रहते हैं।

पहले सत्र का अंत करते हुए हिन्दी चेतना की संपादिका डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने शुभ समाचार दिया कि हिन्दी चेतना का प्रकाशन अब भारत में भी आरम्भ हो रहा है।

अल्पाहार के बाद कार्यक्रम का दूसरा सत्र आरम्भ हुआ| इस सत्र में सबसे पहले डॉ. सुधा ओम ढींगरा के काव्य संग्रह "सरकती परछाइंयाँ" और "कौन सी ज़मीन अपनी" के असमिया अनुवाद का विमोचन हुआ।

 विमोचन के पश्चात एक छोटा सा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था। कवि सम्मेलन का संचालन अभिनव शुक्ल और अध्यक्षता रामेश्वर काम्बोज "हिमांशु" ने की, जो हिन्दी चेतना के संपादक मंडल के सदस्य भी हैं। अभिनव ने स्वरस्वती वंदना के गायन से सम्मेलन की शुरुआत की। काव्य पाठ करने वाले थे – सुदर्शन प्रियदर्शनी, डॉ. सुधा ओम ढींगरा, पंकज सुबीर, अभिनव शुक्ल, धर्मपाल जैन, राज महेश्वरी, डॉ. शैलजा सक्सेना, शैल शर्मा, दीप्ति अचला कुमार और श्याम त्रिपाठी।

कार्यक्रम का अंत श्री श्याम त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन से किया। 


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