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09.13.2008
 

हिन्दी टाइम्स की पहली वर्षगाँठ
सुमन कुमार घई


ज्योति प्रज्वलित करते हुए बायें से दायें- डॉ. बागेश्वरी चक्रधर, प्रो. अशोक चक्रधर, सुश्री नेहा शरद

 

4 अप्रैल को टोरोंटो के लगन बैंक्युट हाल में हिन्दी टाईम्स की पहली वर्षगाँठ मनाई गई। हिन्दी टाईम्स टोरोंटो से प्रकाशित होने वाला दूसरा हिन्दी का समाचारपत्र है। एक ही वर्ष में अपने आप की कैनेडा के हिन्दीभाषी समाज में अपनी पहचान बना लेने में सक्षम हिन्दी टाईम्स ने पहली वर्षगाँठ पर अपनी सफलता को मनाते हुए एक भारीभरकम आयोजन किया। साहित्यिक रूप से विशेष बात यह थी कि इस अवसर पर हिन्दी सम्मेलनके पट्टे के तले एक सांस्कृतिक या मनोरंजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। वास्तव में इस आयोजन को दो भागों में सरलतापूर्वक विभाजित किया जा सकता था। एक तो सांस्कृतिक कार्यक्रम और दूसरा साहित्यिक।

कार्यक्रम थोड़ी देर से आरम्भ हुआ  परन्तु हॉल खचाखच लोगों से भरा हुआ था। समाचार पत्र का समारोह होने के कारण उपस्थित राजनतिज्ञों की कोई कमी नहीं थी। ब्रैम्पटन की मेयर सुश्री सूज़न फेनल, कैनेडा के हाऊस ऑफ़ कॉमन्स के सांसद श्री गुरुबख्श सिंह मल्ली और भारतीय कौंसलावास के उप कौंसल श्री कृष्ण खेतरपाल उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश ने की।

कार्यक्रम का आरम्भ सरस्वती वन्दना से हुआ जिसे श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे ने प्रस्तुत किया। श्रीमती भुवनेश्वरी पांडे हिन्दी परिषदकी सचिव हैं। आमन्त्रित अतिथियों द्वारा ज्योति प्रज्वलित और उनका अभिनन्दन करने के पश्चात सम्मान फलक बाँटने का कार्यक्रम आरम्भ हुआ। जो कि कुछ समय तक चलता रहा। टोरोंटो में शायद पहली बार  एक ही साथ इतने लोगों को सम्मानित किया गया।

डॉ. मधुप मोहता और समय, सपना और तुम

अन्त में हिन्दी भाषा का कार्यक्रम आरम्भ हुआ जिसकी प्रतीक्षा सभी साहित्य प्रेमी कर रहे थे। अध्यक्षीय वक्तव्य में महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश जी ने प्रो. अशोक चक्रधर, डॉ.बागेश्वी चक्रधर का कवितामय अभिनन्दन किया, और फिर माइक चक्रधर जी ने सम्भाल लिया। चक्रधर जी ने अपनी मंचीय कला से सारी सभा को अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने सबसे पहले अपनी धर्मपत्नी डॉ.बागेश्वी चक्रधर को काव्यपाठ के लिए आमन्त्रित किया। उन्होंने अपनी कुछ नई और कुछ पुरानी रचनाएँ सुनाईं। जब बागेश्वरी जी ने लक्ष्मी वन्दना अपने पिता काका हाथरसी जी की शैली में ही सुनाई तो हॉल हँसी के फव्वारों से गूँज उठा।

महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश और सुश्री नेहा शरद

उसके पश्चात डॉ. मधुप मोहता ने अपनी नव-प्रकाशित पुस्तक समय, सपना और तुम में से कई कविताएँ सुनाईं जो कि श्रोतागणों द्वारा सराही गयीं। डॉ. मधुप मोहता के पश्चात सुश्री नेहा शरद को काव्य पाठ के लिए आमन्त्रित किया गया। सुश्री नेहा शरद, जो कि शरद जोशी की सुपत्री हैं, न केवल एक अच्छी संवेदनशी कवियित्री ही हैं अपितु कुशल अभिनेत्री भी हैं। नेहा जी ने अपनी पहली कविता में दपर्ण के माध्यम से स्वयं की भावनाओं का विश्लेषण तथा दूसर में मुम्बई के जन जीवन का कुशल विश्लेषण प्रस्तुत किया। तत्पश्चात उन्होंने अपने पिता श्री शरद जोशी का एक आलेख सुनाया जो कि बिहार की बिगड़ती राजनीति पर व्यंग्य था। इसकी प्रस्तुति में नेहा जी के अभिनय की झलक उनके सम्वादों में झलकती थी।

बाँये से दाँये श्री सुमन कुमार घई, प्रो. अशोक चक्रधर, श्री श्याम त्रिपाठी (सम्पादक हिन्दी चेतना’) श्रीमती सुरेखा त्रिपाठी, महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश

फिर बारी आई उस कवि की जिसकी सभी श्रोता प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रो. अशोक चक्रधर ने तो मानों किसी सम्मोहिनी से सभी श्रोताओं को अपने वश में कर रखा था। ऐसी मंचीय प्रतिभा अभी तक कभी देखने को नहीं मिली। एक बाद एक हास्य कविताओं की प्रस्तुति और उनके अन्तराल में रोचक संस्मरण।  श्रोताओं की माँग पर माँग और प्रो. अशोक चक्रधर जी द्वारा उनको पूरा किये जाना - बस यूँ कहिए समाँ बाँध दिया उन्होंने। लगभग शाम के सात बजे से शुरु हुआ यह कार्यक्रम रात्रि के साढ़े दस भोजन के साथ समाप्त हुआ।


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