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ISSN 2292-9754

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10.04.2014


हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी में विशेष रिपोर्ताज और काव्य पाठ
सुमन कुमार घई

अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती हुई डॉ. शैलजा सक्सेना

१४ सितम्बर, २०१४ – आज हिन्दी राइटर्स गिल्ड की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी के सभागार में संपन्न हुई। आज के कार्यक्रम को दो सत्रों में बाँटा गया था। पहले सत्र में विगत दिनों में भारत में अपने काव्य संकलन "क्या तुमको भी ऐसा लगा?" के लोकार्पण से लौटीं डॉ. शैलजा सक्सेना से रिपोर्ताज प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया था। दूसरे सत्र सदा की तरह कविता, कहानी और आलेख पाठ के लिए निर्धारित था।

कार्यक्रम का आरम्भ सुमन कुमार घई ने उपस्थित मित्रों के स्वागत के साथ करते हुए सूचित किया कि डॉ. शैलजा सक्सेना की भारत यात्रा के दौरान उनकी पुस्तक के लोकार्पण के अतिरिक्त एक अन्य बड़ी उपलब्धि यह रही कि हिन्दी साहित्य अकादमी ने उन्हें "प्रवासी मंच" से एकल कविता पाठ करने के लिए आमन्त्रित किया। कैनेडा के साहित्यिक इतिहास में पहली बार किसी लेखक या लेखिका को यह अवसर मिला।

शैलजा सक्सेना ने अपने पहले रिपोर्ताज में बताया कि अप्रैल में उन्हें अमेरिका में स्थित भारतीय कौंसलावास ने "अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन" में वक्ता के रूप में आमन्त्रित किया था। इस सम्मेलन में यू.एस. के विश्वविद्यालयों के हिन्दी प्राध्यापक भारी संख्या में उपस्थित हुए। न्यू यॉर्क में आयोजित इस सम्मेलन में करेबियाई देशों के अतिरिक्त भारत और मारिशीयस के हिन्दी विद्वानों ने भी भाग लिया। शैलजा जी ने बताया कि सम्मेलन में उत्तरी अमेरिका के संदर्भ में विश्वविद्यालयों में हिन्दी शिक्षण पद्धति के बारे विचार-विमर्श बहुत ज्ञानवर्धक रहा। जॉर्ज बुश प्रशासन के समय अमेरिकी विश्वविद्यालयों को यू.एस. सरकार ने हिन्दी शिक्षण के लिए लाखों डॉलर का अनुदान दिया था। चाहे यह अनुदान विश्व पटल पर भारत की व्यवसायिक उन्नति के संदर्भ में रहा हो परन्तु हिन्दी शिक्षण कार्यक्रम को इससे बहुत लाभ हुआ है। सम्मेलन में यू.एस. और कैनेडा के लिए एक हिन्दी भवन निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया। सम्मेलन के अंतिम दिन डॉ. शैलजा सक्सेना के काव्य संग्रह "क्या तुमको भी ऐसा लगा?" का विमोचन हुआ और एक कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया। डॉ. शैलजा सक्सेना के इस रिपोर्ताज ने श्रोताओं के मन में हिन्दी के प्रति एक नयी आशा की किरण का संचार किया।

शैलजा की दूसरी रिपोर्ट उनकी भारत यात्रा की थी। उन्होंने पहले अपनी पुस्तक के लोकार्पण का भावपूर्ण ब्यौरा देते हुए लोकार्पण कार्यक्रम में उपस्थित अपने उन गुरुओं को याद किया जिनको वह अपने लेखन की प्रेरणा का स्रोत मानती हैं। पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में उपस्थित उल्लेखनीय नाम थे - प्रो. डॉ. नित्यानंद तिवारी, डॉ. द्वारिकाप्रसाद चारुमित्रन (संपादक "अनभै साँचा"), अनिल जोशी (संपादक प्रवासी टुडे), डॉ. लक्ष्मी शंकर बाजपेयी (डॉयरेक्टर ऑल इंडिया रेडियो), संचालन- डॉ. रेखा सेठी (प्रवक्ता, इंद्रप्रस्थ कॉलेज), टिप्पणी- डॉ. सुधा उपाध्याय (प्रवक्ता- जानकी देवी कॉलेज)। कार्यक्रम के अगले दिन डॉ. शैलजा सक्सेना का साक्षात्कार स्वयं डॉ. लक्ष्मी शंकर बाजपेयी जी ने रिकॉर्ड और प्रसारित किया। शैलजा जी को हिन्दी साहित्य अकादमी ने भी अपने "प्रवासी मंच" से एकल काव्य पाठ के लिए आमन्त्रित किया।

शैलजा के रिपोर्तज के पश्चात डॉ. इन्दु रायज़ाद ने "क्या तुमको भी ऐसा लगा?" पर अपनी समालोचना का पाठ किया। सुमन कुमार घई ने समालोचना की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस समीक्षा का स्तर किसी भी प्रकार साहित्य कुंज में निरंतर प्रकाशित होने वाली भारतीय समीक्षकों के लेखन से कम नहीं है।

अल्पाहार के अंतराल के बाद काव्य पाठ आरम्भ हुआ जिसका संचालन श्रीमती सविता अग्रवाल ने किया। श्रोताओं का स्वागत करते हुए उन्होंने सूचित किया कि जगमोहन सांगा जी को हाल ही मी पी-एच. डी. में सफलता मिली है और अब वह डॉ. सांगा हो गए हैं। सभी ने जगमोहन जी को बधाई दी। पहले कवि भी जगमोहन ही थे उन्होंने अपनी कविता "इंतज़ार" सुनाई। क्योंकि हिन्दी राइटर्स गिल्ड के खुला मंच है इसलिए किसी भी भाषा के कवियों का स्वागत किया जाता है। आज पंजाबी के कई कवि और उर्दू के ताहिर गौरा उपस्थित थे। काव्य पाठ करने वाले थे – जगमोहन सांगा, इन्दु रायज़ादा, इक़बाल, ताहिर गौरा, सुरजीत कौर, निर्मल सिद्धू, कैलाश महन्त, सुखविंदर, डॉ. उषा बंसल, पंकज शर्मा, विद्या भूषण, हरबीर ग्रेवाल, राज कश्यप, तारा सिंह, आशा बर्मन, राज महेश्वरी, भगवत शरण श्रीवास्तव, कृष्णा वर्मा, सुमन कुमार घई, पूनम चंद्रा मनु, शैलजा सक्सेना और सविता अग्रवाल। इस सत्र का संचालन भी श्रीमती सविता अग्रवाल जी ने किया था। विजय विक्रान्त जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही कार्यक्रम समाप्त हुआ।


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