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ISSN 2292-9754

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05.15.2017


हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने मनाया आभार दिवस - २०१७
डॉ. शैलजा सक्सेना

और अधिक चित्रों के लिए क्लिक कर्रें - हिरागि आभार दिवस - २०१७

"आषाढ़ की एक गुनगुनी शाम, अंजुरी भर कविता, चुटकी भर नाटक, मुठ्ठी भर गान"

शनिवार अप्रैल २८, २०१७ को “हिन्दी राइटर्स गिल्ड” का “आभार-दिवस” और “आषाढ़ की एक गुनगुनी शाम, अंजुरी भर कविता, चुटकी भर नाटक, मुठ्ठी भर गान” कार्यक्रम “ला विक्टोरिया बैंक्यैट हॉल” में शाम ७ बजे भोजन के साथ प्रारंभ किया। “हिन्दी राइटर्स गिल्ड” ने यह कार्यक्रम पिछले वर्ष प्रस्तुत “आधे-अधूरे” की टीम और पिछले तीन-चार वर्षों के अपने प्रायोजकों को सम्मानित करने और धन्यवाद देने के लिये आयोजित किया था। मोहन राकेश द्वारा लिखित प्रसिद्ध नाटक “आधे-अधूरे” की सफल प्रस्तुति के लिये निर्देशक श्री प्रकाश दाते जी और उनकी पूरी टीम ने लगभग ६ माह की मेहनत से यह नाटक पिछले वर्ष अप्रैल माह में तैयार किया था और इस नाटक की तीन बहुत सफल प्रस्तुतियाँ हुई थीं।

कार्यक्रम का आरंभ संस्था की परामर्शमंडल की एक निदेशिका श्रीमति लता पांडे ने सब का स्वागत करते हुये और संस्था के कार्यक्रमों का परिचय देने के साथ किया। तत्पश्चात “आधे-अधूरे” नाटक की टीम को मीरा बाई की मूर्ति और पेन देकर सम्मानित किया गया और प्रायोजकों को पेन और धन्यवाद पत्र देकर उनका आभार व्यक्त किया गया। यह सम्मान संस्था के तीन संस्थापक निदेशकों- श्री विजय विक्रांत, श्री सुमन कुमार घई, डॉ. शैलजा सक्सेना और दो कार्यसंचालन निदेशिकाओं- श्रीमति कृष्णा वर्मा और श्रीमति सविता अग्रवाल ने प्रदान किये। प्रायोजकों का आभार परामर्शमंडल के निदेशकों ने किया। इसके बाद श्रीमति लता पांडे ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच संचालन हेतु संस्था की सह-संस्थापक निदेशिका डॉ. शैलजा सक्सेना को आमंत्रित किया।

डॉ. शैलजा सक्सेना ने कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती वंदना से करने के लिये श्रीमति शोनाली रे को आमंत्रित किया जिन्होंने सरस्वरी वंदना को शास्त्रीय संगीत पर आधारित अपनी बनाई बंदिश में प्रस्तुत किया। तबले पर उनकी संगत की श्री अंजन घोष ने की और साथ में थे टोरोंटो के प्रसिद्ध हार्मोनियम वादक श्री राया बिडे। इसके बाद बहु-भाषा कविता प्रस्तुति का कार्यक्रम था जिसमें आठ भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी में कविताओं की प्रस्तुति हुई। डॉ. शैलजा सक्सेना ने बताया कि भारत में पिछले १०० वर्षों में १०६५ में से ८५० भाषायें खो चुकी हैं जो दुख की बात है पर साथ ही कुछ बोलियों ने साहित्य समृद्धि के कारण ”भाषा’ होने की मान्यता भी प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने संक्षेप में, कार्यक्रम में प्रस्तुत की जाने वाली हर भाषा के प्रारंभ और उसके कुछ प्रसिद्ध लेखकों का नाम बताते हुये उस भाषा के साहित्यकार को एक रचना प्रस्तुत करने के लिये आमंत्रित किया। हर साहित्यकार ने रचना का सारांश पहले हिन्दी में समझाया और फिर उस भाषा में मूल कविता को प्रस्तुत किया। इससे दर्शकों को भी इन रचनाओं का पूरा आनंद मिला। कार्यक्रम में प्रस्तुत भाषायें और उनके प्रस्तुतकर्ता इस प्रकार थे: संस्कृत-आचार्य संदीप कुमार त्यागी (ओम-स्वरचित कविता), काश्मीरी- श्रीमति रूपावति धर (१८वीं सदी की लेखिका आरिणीमाल का विरह गीत), बांग्ला- श्रीमति आशा बर्मन (हारिये जावा बंधु-बांगलादेश की लेखिका-फरज़ाना अहमद श्यान), गुजराती- नैमेष नानावटी (शबरी, लेखक- सौम्य जोशी ), मराठी-नमिता दांडेकर( कोरया कोरया कागदावर, लेखक-स्वर्गीय मंगेशपडगाँवकर), भोजपुरी-लता पांडे (मन चहकता-लेखक गणपति सिंह), अवधी- उदय चौहान (रसखान के छंद), पंजाबी-सुरजीत कौर (स्वरचित) हिन्दी-संदीप कुमार (रश्मिरथी- लेखक-राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर), अंग्रेज़ी- डॉ. जगमोहन साँगा (स्वरचित। डॉ. शैलजा सक्सेना ने कहा कि आज ये भाषायें अपने-अपने छोटे खानों में से निकल कर भावों के सुन्दर आकाश में एक साथ उड़ रहीं हैं, जो अपने आप में एक उपलब्धि और नयी शुरूआत है। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुये टोरोंटो की प्रसिद्ध लेखिका और गायिका श्रीमति मानोशी चैटर्जी ने दो गीत प्रस्तुत किये हैं जिनमें से एक गीत श्री अमिताभ त्रिपाठी ”अमित” जी द्वारा रचित था। दूसरे गायक श्री दर्शक वैष्णव ने अपनी मंजी हुई आवाज़ में एक गुजराती गीत और हिन्दी कवि गोपालदास नीरज जी द्वारा रचित गीत प्रस्तुत किया। अंतिम प्रस्तुति थी, लघु नाटिका, “चीफ़ की दावत”। यह स्व. भीष्म साहनी जी की कहानी का नाट्यरूपांतरण था। नाट्य-रूपांतरण और निर्देशन किया था, डॉ. शैलजा सक्सेना ने और कलाकार थे- लड़के की भूमिका में विद्याभूषण धर, पत्नी-अनुभा शंकर झा, चीफ़- निर्मल सिद्धू और माँ –कृष्णा वर्मा। लगभग १८० लोगों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया।

पिछले नौ वर्षों से “हिन्दी राइटर्स गिल्ड” टोरोंटो, कनाडा में हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के कामों में निरंतर लगी हुई है। एक दानार्थी संस्था द्वारा आभार दिवस और बहुभाषा कवि सम्मेलन का यह उच्चस्तरीय कार्यक्रम, हिन्दी जगत की एक नयी उपलब्धि माना जा सकता है।

आभार दिवस की फोटोग्राफी की दीपक राज़दान ने और वीडियोग्राफर थे नवीन पांडे।


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