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ISSN 2292-9754

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12.17.2015


कैनेडा के मंच पर दिखाई दी – "झाँकी हिन्दुस्तान की"
हिन्दी राइटर्स गिल्ड का ७वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न


ताल डांस एकेडमी की नृत्यांगनाएँ हिन्दी राइटर्स गिल्ड की सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर

२८ नवम्बर, २०१५, मिसिसागा – आज मिसिसागा के ग्लैनफ़ॉरेस्ट सेकेंडरी स्कूल के सभागार में हिन्दी राइटर्स गिल्ड (हिरागि) का ७वां वार्षिक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस वर्ष के कार्यक्रम का नाम "झाँकी हिन्दुस्तान की" था और नाम जैसी ही कार्यक्रम की संरचना थी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टोरोंटो में भारतीय काउंसलावास के काउंसलाधीश महामहिम अखिलेश मिश्र जी थे। साथ ही आचार्य श्रीनाथ दिवेदी जी भी इस कार्यक्रम के अत्यंत महत्त्वपूर्ण अतिथि थे जिन्हें इस वर्ष "सरस्वती सम्मान" से सम्मानित करने के लिये वैंकुवर से आमन्त्रित किया गया था। आचार्य श्रीनाथ प्रसाद द्विवेदी कई दशकों से कैनेडा में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में तन-मन-धन से कार्यरत हैं। प्रकाशित कार्यक्रम में आचार्य द्विवेदी जी की उपलब्धियों को विस्तार से बताया गया था और साथ ही कार्यक्रम की रूपरेखा और हिन्दी राइटर्स गिल्ड के लक्ष्य-कथन और उपलब्धियों को बताया गया था। यह कार्यक्रम सुमन कुमार घई जी ने बहुत मेहनत से तैयार किया था, जिसकी सराहना सबने की।

कार्यक्रम के आरम्भ होने का समय संध्या के ५:३० तय हुआ था। दर्शक पाँच बजे से जुटना आरम्भ हो गये। आने वाले लोगों का तिलक और पुष्पों से स्वागत करने के लिए दो नन्हीं बच्चियाँ अदिति सक्सेना और शान शर्मा खड़ीं थीं। लॉबी में कार्यक्रम के प्रायोजकों के मेज़ और स्टाल लगे थे। किशोर स्वयंसेवक भाग-दौड़ करते हुए अंतिम प्रबन्ध कर रहे थे। टिकट काउंटर पर भीड़ जुटने लग गई थी और श्रीमती ऋचा वर्मा बहुत कुशलता से दर्शकों का स्वागत करते हुए उन्हें टिकट बेच रही थीं। मुख्य अतिथियों काउंसलाधीश श्री अखिलेश मिश्र और आचार्य श्रीनाथ द्विवेदी जी की आगवानी करने के लिए सुमन कुमार घई और संजीव अग्रवाल खड़े थे। हॉल में पूनम चंद्रा ’मनु’ द्वारा बनाया हुआ मोहक स्लाइड शो चल रहा था जिस पर प्रायोजकों के नामों के साथ ही हिन्दी राइटर्स गिल्ड की अब तक की उपलब्धियों की झाँकी चल रही थी। पूनम चंद्रा ’मनु’ बहुत मेहनत से प्रत्येक वर्ष संस्था की उपलब्धियों का स्लाइड शो दर्शकों तक पहुँचाती है।


अदिति बर्मन (राष्ट्रगान), नवीन पांडे (सरस्वती वन्दना), मानोशी चटर्जी (काव्यपाठ), काउंसलाधीश श्री अखिलेश मिश्र सम्बोधन, आचार्य श्रीनाथ द्विवेदी जो सरस्वती पु्रस्कार और शॉल ओढ़ाते हुए सुमन कुमार घई एवं द्विवेदी जी का काव्यपाठ, कार्यक्रम के प्रथम भाग के संचालक पंकज शर्मा, कहानी पाठ १- निर्मल सिद्धू "उलझा रिश्ता" लेखक: सुमन कुमार घई, २. डॉ. शैलजा सक्सेना "मैं ज़िंदा रहू्गा" लेखक: विष्णु प्रभाकर, ३. पूनम चंद्रा "मनु" "नवजन्मा" लेखक: रामेश्वरल काम्बोज "हिमांशु", दर्शकगण, सुमन कुमार घई के साथ काउंसधीश श्री अखिलेश मिश्र और अरुण बर्मन प्रीति भोज के अंतिम प्रबंध करते हुए

कार्यक्रम ठीक समय यानी संध्या के ५:३० पर मुख्य अतिथियों के पहुँचते ही आरम्भ हो गया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने दर्शकों का स्वागत किया और कार्यक्रम के प्रारंभ में दो मिनट का मौन रखवा कर डॉ.महीप सिंह को श्रद्धांजलि दी। हिन्दी राइटर्स गिल्ड का प्रारंभ डॉ. महीप सिंह जी के हाथों अगस्त ९, २००८ को हुआ था और उसके बाद से ही उनका स्नेह-आशीर्वाद इस संस्था को मिलता रहा। इस के बाद उन्होंने कार्यक्रम के प्रायोजकों, दर्शकों और अन्य संस्थाओं को धन्यवाद दिया जिनके सहयोग से आज कार्यक्रम संभव हो पाया था।

उन्होंने आगे के कार्यक्रम के संचालन की बागडोर पंकज शर्मा को सौंप दी। उपस्थित प्रायोजक थपलियाल एंड राय के श्री मुरारीलाल थपलियाल जी को मंच पर आमन्त्रित करके सुमन कुमार घई ने स्मृति-फलक (प्लैक) भेंट करके धन्यवाद दिया। पंकज जी ने सरस्वती वन्दना के लिए नवीन पांडे को आमन्त्रित किया जिन्होंने अपने ओजस्वी स्वर से सरस्वती वन्दना का गायन किया। इसके बाद भरतनाट्यम के माध्यम से वर्णिका गुप्ता व आरुषि अरोरा ने गणेश वन्दना की। पंकज शर्मा ने काउंसलाधीश श्री अखिलेश मिश्र को मंच पर आमन्त्रित किया और उनका स्वागत डॉ. शैलजा सक्सेना ने फूलों से किया। अपने वक्तव्य में मिश्र जी ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि गिल्ड में वो क्षमता है कि वह विभिन्न भारतीय भाषाओं का एक मिला-जुला कवि सम्मेलन कर सकती है। आज के कार्यक्रम में भारत के विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक झाँकियों के लिए उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।

\इसके बाद हिन्दी राइटर्स गिल्ड की लेखिका और परिचालन निदेशिका श्रीमती सविता अग्रवाल "सवि" के काव्य-संकलन "भावनाओं के भँवर से" का विमोचन श्री अखिलेश मिश्र और आचार्य श्रीनाथ द्विवेदी के कर-कमलों से हुआ। विमोचन के समय हिन्दी राइटर्स गिल्ड के संस्थापक निदेशक सुमन कुमार घई, संस्थापक निदेशिका डॉ. शैलजा सक्सेना, परिचालन निदेशिका श्रीमती कृष्णा वर्मा भी उपस्थित थे। सविता जी ने अपनी पुस्तक के प्रकाशन में हिन्दी राइटर्स गिल्ड की सहायता को मान्यता देते हुए सभी का धन्यवाद किया।

"भावनाओं के भँवर से" के विमोचन के बाद धन्यवाद करती लेखिका श्रीमती सविता अग्रवाल

विमोचन के बाद सुमन कुमार घई ने दर्शकों से आचार्य श्रीनाथ द्विवेदी जी का औपचारिक परिचय करवाया। श्री अखिलेश मिश्र जी ने आचार्य जी को सरस्वती सम्मान का स्मृति फलक भेंट किया, सुमन कुमार घई ने शॉल ओढ़ाया और डॉ. शैलजा सक्सेना ने पुष्प-गुच्छ से उनका अभिनन्दन किया। द्विवेदी जी ने अपने वक्तव्य में भाषा और संस्कृति के गठबंधन के महत्व की चर्चा करते हुए आज के कार्यक्रम के संदर्भ को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अपने वक्तव्य के अंत में स्वलिखित कुछ मुक्तकों और एक गीत का सस्वर पाठ किया जिसे दर्शकों ने बहुत पसन्द किया।

पंकज शर्मा ने हिन्दी राइटर्स गिल्ड की पिछले वर्ष की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए हर महीने में गिल्ड की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

इन औपचारिक प्रस्तुतियों के पश्चात कार्यक्रम का साहित्यिक चरण आरम्भ हुआ।

साहित्यिक चरण का आरम्भ किया मानोशी चटर्जी ने "माँ" पर लिखी अपनी दो भावपूर्ण कविताओं के साथ। दोनों की अभिव्यक्ति की शैली बंग्ला काव्य पाठ "आवृत्ति" शैली की थी। शायद हिरागि के मंच से यह पहला प्रयोग था और श्रोताओं ने इसे बहुत सराहा। सदा की तरह कुछ नया करते हुए हिरागि ने इस बार कहानियों का नाट्य-पाठ किया। पहली लघुकथा सुमन कुमार घई द्वारा लिखित "उलझा रिश्ता" थी, जिसे पढ़ा निर्मल सिद्धू ने। कथा के अंत में सयास ही पूरा ऑडिटोरियम खिलखिला उठा। अगली लघुकथा "नवजन्मा" के लेखक थे हिरागि के मानद सदस्य श्री रामेश्वर काम्बोज "हिमांशु"। इस कहानी की नाट्य प्रस्तुति की पूनम चंद्रा "मनु" ने। कहानी में सही समय पर ढोल के संगीत ने समां बाँध दिया। स्व. विष्णु प्रभाकर की कहानी "मैं ज़िंदा रहूँगा" के अंश का नाट्य पाठ किया डॉ. शैलजा सक्सेना ने। शैलजा ने अपने स्वर के उतार-चढ़ाव से कहानी के भावों और सम्वेदनाओं को सजीव कर दिया। इस के अंत में भोजन का अंतराल हुआ।

अगला सत्र भारत के विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का था। इस चरण की संचालिका थीं हिरागि की परिचालन निदेशिका श्रीमती कृष्णा वर्मा। उन्होंने कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए हिन्दी राइटर्स गिल्ड की टीम और किशोर स्वैच्छिक सेवकों का धन्यवाद किया। पहली प्रस्तुति, "ताल डांस ऐकडमी" की सात नृत्यंगनाओं गौरी खांडके, मोनिषा दाते, मानसा रायावरपु, अंजुली देवधरे, शैली सोमन, श्रुति पारेख और समीना तालुकदार द्वारा कत्थक की थी। इस ग्रुप की दूसरी प्रस्तुति कत्थक फ़्यूजन की थी। दर्शक इस आनन्द उठाते रहे और झूमते रहे। अगला नृत्य काश्मीरी ओवरसीज़ एसोसिएशन ऑफ़ कैनेडा की शीन थुस्सू ने काश्मीरी प्रणय गीत पर किया। पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हुए "सुर-रंग स्कूल ऑफ़ म्यूज़िक" की रागिनी सिंह ने शबद गायन किया और उनके साथ तबले पर संगत निखिल गौड़ ने की। रागिनी सिंह सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका श्रीमती रमणीक सिंह की सपुत्री एवं शिष्या हैं। इसके बाद कार्यक्रम बंगाल में पहुँचा। वेदांत सोसाइटी ऑफ़ कैनेडा से आईं श्रीमती दीपा भट्टाचार्य ने एक बंग्ला भजन प्रस्तुत किया। फिर बंगाल से सटा बिहार मंच पर उतर आया। सुमिता सिन्हा, शोभा तिवारी, नीरजा मिश्रा, ज्योत्सना कुमारी, कामिनी सिंह संयोगिता तिवारी और लता पांडे ने ढोलक की थाप पर लोक नृत्य के साथ कजरी का गायन किया। कार्यक्रम के अंत में महाराष्ट्र का नृत्य लावणी अंजुलि देवधरे ने प्रस्तुत किया। लावणी नृत्य की जीवंतता ने पूरे दर्शक समुदाय को अभिभूत कर दिया और करतल ध्वनि की गूँज से आज की संध्या का अंत हुआ।


सांस्कृतिक चरण की संचालिका कृष्णा वर्मा, गणेश वन्दना वर्णिका गुप्ता व आरुषि अरोरा, ताल एकेडमी की नर्तकियाँ, रमणीक सिंह निखिल गौड़ और रागिनी सिंह का परिचय देते हुए, लावणी की प्रस्तुति अंजुलि देवधरे, विद्याभूषण धर काश्मीर प्रांत की नर्तकी शीना थुस्सू का परिचय देते हुए, आशा बर्मन वेदांता सोसाइटी की गायिका दीपिका भट्टाचार्य का परिचय देते हुए, बिहार एंड झारखंड एसोसिएशन ऑफ़ कैनेडा की "कजरी"

इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हिन्दी राइटर्स गिल्ड के सक्रिय सदस्यों आशा बर्मन, अरुण बर्मन, सविता अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, कृष्णा वर्मा, पूनम चंद्रा "मनु”, विद्या भूषण धर, पंकज शर्मा, शैलजा सक्सेना और सुमन घई को हार्दिक बधाई। इसके अतिरिक्त स्वैच्छिक सेवा देने वाले बच्चों, श्रीमती ऋचा वर्मा एवं अन्य कार्यकर्ताओं का हार्दिक धन्यवाद, जिनके परिश्रम से इतना बड़ा कार्यक्रम निर्बाध संपन्न हुआ।


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