अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
02.19.2016


हिन्दी राइटर्स गिल्ड द्वारा "भावनाओं के भँवर से" पर चर्चा और रामधारी सिंह दिनकर साहित्य का स्मरण
सुमन कुमार घई



ब्रैम्पटन, १३ फरवरी, २०१६ – आज हिन्दी राइटर्स गिल्ड (कैनेडा) की मासिक गोष्ठी ब्रैम्पटन लाइब्रेरी की चिंकूज़ी शाखा के सभागार में संपन्न हुई। आज की गोष्ठी को दो सत्रों में रखा गया। पहले सत्र में गिल्ड की लेखिका सविता अग्रवाल "सवि" के काव्य संकलन "भावनाओं के भँवर से" पर चर्चा होनी तय थी और दूसरे सत्र में राष्ट्रीय कवि स्व. रामधारी सिंह "दिनकर" के साहित्य पर चर्चा और काव्य पाठ।

दोपहर बाद, दो बजे गोष्ठी को आरम्भ करते हुए डॉ. शैलजा सक्सेना ने अतिथियों का स्वागत किया उनको धन्यवाद दिया जो कि बाहर शून्य से २८ डिग्री सेल्सियस न्यून तापमान (विंड चिल्ल -३८) में भी कार्यक्रम के लिए उपस्थित हुए। शैलजा जी ने सभी को बसन्त पंचमी की बधाई देते हुए, गरमा-गरम चाय और अल्पाहार के लिए आमंत्रित किया। श्रोताओं ने चाय के साथ पकौड़ों, ढोकले और मिठाइयों का आनन्द उठाया जो कि श्रीमती सविता अग्रवाल और श्री संजीव अग्रवाल के सौजन्य से थीं।

लगभग ढाई बजे मुख्य कार्यक्रम शुरू होने से पहले लाइब्रेरी की प्रतिनिधि सुश्री सुखजीत कोंबो (एडल्ट एंड इथनिक बुक्स लाइब्रेरियन) ने लाइब्रेरी की विभिन्न सेवाओं से श्रोताओं को अवगत करवाया और गिल्ड के सदस्यों और उपस्थितजनों को लाइब्रेरी का सदस्य बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि ब्रैम्पटन लाइब्रेरी सिस्टम १८ भाषाओं की पुस्तकें उपलब्ध करवाता है।

कार्यक्रम के प्रथम भाग का संचालन श्रीमती आशा बर्मन ने किया। उन्होंने सविता जी को बधाई देते हुए उन्हें कविता पाठ के लिए बुलाया। सविता अग्रवाल "सवि" ने अपनी लेखन यात्रा के बारे में बताया कि यह ८वीं कक्षा से आरम्भ हुई थी जो अभी तक चल रही है। उन्होंने अपनी पुस्तक "भावनाओं के भँवर से" की पाँच कविताओं का पाठ किया और उन कविताओं की पृष्ठभूमि की भी चर्चा की। उन्होंने अपने पति संजीव अग्रवाल और सुमन कुमार घई का धन्यवाद किया जिन्होंने पुस्तक प्रकाशन के लिए बहुत परिश्रम किया है।

पुस्तक की चर्चा का आरम्भ सुमन कुमार घई (संस्थापक निदेशक हिन्दी राइटर्स गिल्ड, प्रकाशक, संपादक साहित्यकुंज.नेट) ने किया। उन्होंने कहा कि इस काव्य संकलन की कविताएँ सकारात्मक अभिव्यक्ति हैं, कहीं पर भी कुंठा या संत्रास का आभास नहीं है। उन्होंने "खण्डहर अवशेष" को संकलन की एक सशक्त रचना कहते हुए उसकी कुछ पंक्तियों का उद्धरण किया।

अगले वक्ता वरिष्ठ कवि उमाकांत दुबे "अंजान" थे। उन्होंने आवरण से चर्चा आरम्भ की कि हालाँकि भँवर नकारात्मक बिंब है परन्तु सविता जी ने उसे सकारात्मक में बदल दिया है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा - जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे "सवि"। उन्होंने कविताओं में सार्थक शब्द चयन के लिए सविता जी को बधाई दी।

आचार्य संदीप त्यागी "दीप" ने कहा – "कविता जीवन की व्याख्या है।" उन्होंने अपने वक्तव्य का आधार "स्वाति बूँद" कविता को बनाया। उन्होंने "कवि-समय" में रचित इन कविताओं को श्रेष्ठ कहा।

भुवनेश्वरी पांडे ने कई कविताओं की चर्चा करते हुए कहा कि यह कविताएँ नगीने की तरह हैं। कुछ नारी विमर्श की कविताओं के बारे में उनका कहना था कि यह केवल समस्या का बखान ही नहीं करतीं बल्कि समाधान भी सुझाती हैं।

नवोदित कवि अजय गुप्ता ने अपनी हास्य शैली में कविताओं का विश्लेषण करते हुए कविताओं में निहित गंभीर संदेश की ओर ध्यान दिलाया।

डॉ. शैलजा सक्सेना ने चर्चा की कि सविता जी कविताओं में जीवन भँवर का द्वंद्व है और यह भँवर मन के भावों का होता है, जिससे कविता उत्पन्न होती है। उन्होंने कविता "फिर भी है जीवन स्वीकार" की विशेष रूप से चर्चा की।

श्रीमती प्रमिला भार्गव ने कहा कि पुस्तक प्रकाशन एक साधना की तरह होता है। उन्होंने पुस्तक की कई कविताओं की चर्चा करते हुए टिप्पणी की।

संजीव अग्रवाल जी ने पुस्तक प्रकाशन के बारे में बताया। हालाँकि संजीव अग्रवाल बहुत कम लिखते हैं परंतु अपनी पत्नी की पहली पुस्तक प्रकाशन के उपलक्ष्य में उन्होंने "हे सविते" कविता लिखी, जो उन्होंने सुनाई।

अंतिम वक्ता सत्र की संचालिका आशा बर्मन थीं। उन्होंने सविता जी की कविताओं के विषय में कहा कि इस संकलन की कविताओं में जीवन के अनुभूत सत्य उभर कर सामने आए हैं।

दूसरे सत्र में दिनकर जी के साहित्य पर बोलने वाले दो वक्ता थे। इस सत्र का संचालन श्री सुरेश पांडे ने किया। पहली वक्ता डॉ. इन्दु रायज़ादा थीं जिन्होंने दिनकर साहित्य पर अपने शोध पत्र का वाचन किया। डॉ. शैलजा सक्सेना ने दिनकर जी के बारे में अपने वक्तव्य से पहले इंटरनेट के माध्यम से दिनकर जी वाणी में कविता श्रोताओं को सुनाई। उन्होंने दिनकर साहित्य के विभिन्न रसों, सामाजिक दायित्व और अन्य आयामों की ओर इंगित करते हुए भाषा की भी चर्चा की। अगले चरण में डॉ. उषा बंसल (भूतपूर्व प्राध्यापक बीएचयू), संदीप कुमार और आशा बर्मन जी ने दिनकर जी की एक-एक कविता सुनाई। कार्यक्रम का अंत करते हुए सुरेश पाण्डे जी ने रश्मि रथी का एक पद्य सुनाया। हिन्दी राइटर्स गिल्ड ने कुछ वर्ष पूर्व अपने वार्षिक महोत्स्व में "रश्मि रथी" का मंचन किया था और उसमें सुरेश पांडे जी ने सूत्रधार की भूमिका निभायी थी।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें