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| 08.01.2008 |
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आदेश संध्या |
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महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश,
प्रवासी भारतीय रत्न का साहित्य जगत में एक विशेष स्थान है।
180
से अधिक पुस्तकों के लेखन के पश्चात जिनमें दो प्रकाशित महाकाव्य
(अनुराग और शकुन्तला) भी सम्मिलित हैं,
महाकवि अब तीसरे महाकाव्य को सम्पूर्ण
करने
में व्यस्त हैं। चौबीस घंटे साहित्य सृजन में डूबे रहते हुए भी महाकवि
कभी भी नये कवियों और लेखकों को प्ररेणा व प्रोत्साहन देने से नहीं
चूकते। ऐसे महाकवि को जब कवि सम्मेलनों में पर्याप्त समय काव्य-पाठ के
लिए न मिले तो साहित्य प्रेमियों की काव्य-पिपासा कभी शान्त नहीं हो
पाती। इसी का निवारण करने के लिए डॉ. भारतेन्दु
श्रीवास्तव ने एक महत्वपूर्ण
निर्णय लेकर आदेश-संध्या का आयोजन अपने सदन पर किया।
डॉ.
भारतेन्दु
श्रीवास्तव ने लगभग बीस से अधिक कवियों को एक कवि सम्मेलन के लिए
आमन्त्रित किया और काव्य-पाठ का मुख्य भाग आदेश जी के लिए ही रखा।
अल्पाहार के पश्चात लगभग साँय के चार बजे भारतेन्दु
जी के
स्वागतीय शब्दों के साथ कार्यक्रम आरम्भ हुआ। श्रीमती दीप्ती अचला
कुमार के संचालन में आदेश जी को ही सर्वप्रथम काव्यपाठ के लिए
आमन्त्रित किया गया। आदेश जी ने बताया कि आज वह सभी रसों की कविताएँ
पढ़ेंगे जिसको सुनकर सभी कविगण अत्यन्त हर्षित हुए और महाकवि ने भी अपने
कथनानुसार ही कविताएँ सुनानी आरम्भ कीं। प्रथम चरण में उन्होंने हास्य
रस की कविताओं का पाठ किया और महाकवि का यह रूप प्राय: कवि सम्मेलनों
में देखने को नहीं मिलता। दूसरे चरण में महाकवि ने अपने महाकाव्य
‘शकुन्तला’
में
से कई
रसों
की कविताएँ पढ़ीं। महर्षि
विशिष्ठ और विश्वामित्र के युद्ध के वर्णन के संदर्भ
में
वीर रस और विभीत्स रस की कविताएँ सुनने को मिलीं। शकुन्तला महाकाव्य
सौंदर्य
प्रधान काव्य है तो शृंगार रस की कविताएँ सुनना स्वाभाविक ही था। फिर
महाकवि ने वात्सल्य रस की कविताओं का भी पाठ किया। कहा जाता है कि
सूरदास के बाद महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश ने ही इतना अधिक वात्सल्य रस
में काव्य-सृजन किया है। महाकवि की वाणी में महाकाव्य पाठ का आनन्द तो
श्रोतागण ही जानते हैं। अंतिम चरण में महाकवि ने अपने अन्य काव्य
संकलनों में से कई
रचनाएँ सुनाई
और
अन्त में श्रीमती आशा बर्मन के अनुरोध पर उन्होंने अपनी सुप्रसिद्ध
रचना
“आमों
की पंचायत”
सुनाई। यह रचना ने न केवल आमों की विभिन्न जातियों व उप जातियों को याद
दिलाया अपितु
भारत
की चुनाव प्रणाली पर कटाक्ष भी किया।
इस
संध्या में काव्य पाठ करने वाले अन्य कवि इस प्रकार हैं। सर्वश्री
कैलाश चन्द्र भटनागर,
डॉ.
भारतेन्दु
श्रीवास्तव,
डॉ.
शिवनन्दन सिंह यादव,
संदीप
त्यागी,
सुमन
कुमार घई,
राज
महेश्वरी,
डॉ.
ब्रजराज किशोर कश्यप,
डॉ.
देवेन्द्र मिश्रा,
जगदीश
शारदा शास्त्री,
डॉ.
शिव पाल। सर्वश्रीमती अरुणा भटनागर,
डॉ.
शैलजा सक्सेना,
आशा
बर्मन,
दीप्ती अचला कुमार,
सरोज
भटनागर,
स्नेह
सिंघवी। |
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