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ISSN 2292-9754

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01.01.2015


राष्ट्रीय ख्याति के सत्रहवें अम्बिका प्रसाद दिव्य साहित्य पुरस्कार घोषित
जगदीश किंजल्क
(संयोजक: दिव्य पुरस्कार)

श्री रवीन्द्र बडगैंया पुरस्कृत, एवं सात लेखकों को दिव्य प्रशस्ति पत्र

भोपाल। राष्ट्रीय ख्याति के बहुचर्चित अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों की घोषणा, मंगलवार 30 दिसम्बर 2014 को साहित्य सदन, सांईनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार, भोपाल में आयोजित एक साहित्यिक समारोह में की गई। पुरस्कारों की घोषणा डॉ. हरिसिंह गौर वि.वि. सागर के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक एवं प्रसिद्ध विद्वान डॉ. आनन्द त्रिपाठी एवं इलाहाबाद की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा ने संयुक्त रूप से की। इक्कीस सौ रुपये राशि के दिव्य पुरस्कार, श्री पंकज परिमल (साहिबाबाद) को उनके खंडकाव्य "उत्तम पुरुष का गीत" डॉ. शशिवर्धन शर्मा शैलेश, (नागपुर) को उनके उपन्यास "वक्त की आँधियाँ," श्री वनाफर चन्द्र (भोपाल) को उनके कहानी संग्रह "उसकी डायरी" डॉ. राकेश कुमार सिंह (आगरा) को उनके निबन्ध संग्रह "धनिया की कामधेनु" एवं श्री रवीन्द्र बडगैंया (बिलासपुर) को उनके व्यंग संग्रह "तो अंग्रेज क्या बुरे थे" के लिए प्रदान किये जायेंगे। इसके अलावा श्री राघवेन्द्र तिवारी (भोपाल) को उनके काव्य संग्रह "स्थापित होता है शब्द हर बार", श्री हातिम जावेद मेहसी (चंपारण) को उनके ग़ज़ल संग्रह, "वक्त की हथेली में", श्री प्रेमचंद सहजवाला (दिल्ली) को उनके उपन्यास "नौकरीनामा बुद्धू का", श्रीमती रंजना फतेपुरकर (इंदौर) को उनके लघु कथा संग्रह "बूंदों का उपहार" श्री कृष्ण नागपाल (नागपुर) को उनके निबन्ध संग्रह "अजगर और मेमने" श्री सदाशिव कौतुक (इंदौर) को उनके व्यंग्य संग्रह "भगवान दिल्ली में" के लिये तथा "शब्द प्रवाह" पत्रिका को श्रेष्ठ संपादन हेतु श्री संदीप सृजन (उज्जैन) को अम्बिका प्रसाद दिव्य प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जायेंगे। दिव्य पुरस्कारों के संयोजक श्री जगदीश किंजल्क ने बताया कि इन पुरस्कारों हेतु देश के कोने-कोने से कुल 147 पुस्तकें प्राप्त हुई थीं। सत्रहवें दिव्य पुरस्कारों के विद्वान निर्णायक हैं – प्रो. आनन्द त्रिपाठी, श्री माता चरण मिश्र, श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा, श्री मयंक श्रीवास्तव, श्री राजेन्द्र नागदेव, श्री प्रियदर्शी खैरा, श्री संतोष खरे, प्रो. रामदेव भारद्वाज, श्री प्रभुदयाल मिश्र, श्री कुमार सुरेश, एवं श्री जगदीश किंजल्क। साहित्य सदन की व्यवस्थापक श्रीमती राजो किंजल्क ने बताया कि ये पुरस्कार शीघ्र ही विद्वानों को उपलब्ध कराये जायेंगे। अठारहवें दिव्य पुरस्कारों हेतु भी पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं।


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