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11.27.2007
 

हँस-हँस गाने गाएँ हम !
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागरवर्षा

वर्षा
डॉ. महेन्द्र भटनागर

सर-सर करती चले हवा
पानी बरसे झम-झम-झम !
आगे-आगे
गरमी भागे
हँस-हँस गाने गाएँ हम !
सर-सर करती चले हवा
पानी बरसे झम-झम-झम
मेंढक बोल
पंछी ड़ोल
बादल गरजें; जैसे बम !
सर-सर करती चले हवा
पानी बरसे झम-झम-झम !
नाव चलाएँ
खूब नहाएँ
आओ कूदें धम्मक - धम !
सर-सर करती चले हवा
पानी बरसे झम-झम-झम !

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