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12.25.2007
 

हँस-हँस गाने गाएँ हम !
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर

माँ
डॉ. महेन्द्र भटनागर

माँ ! तू हमको प्राण से भी प्यारी है !
मीठा दूध पिलाती है
रोटी रोज खिलाती है
हँस-हँस पास बुलाती है
गा-गा गीत सुलाती है
दुनिया की सब चीजों से तू न्यारी है !
माँ ! तू हमको प्राणों से भी प्यारी है !
कहती हर रात कहानी,
बातें अपनी पहचानी,
सुन जिनको हम खुश होते
सुख सपनों में जा सोते,
हे माँ तुझ पर सब वैभव बलिहारी है !
माँ ! तू हमको प्राणों से भी प्यारी है !

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