अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
11.27.2007
 

हँस-हँस गाने गाएँ हम !
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर 

खेलें खेल
डॉ. महेन्द्र भटनागर

छुक-छुक करती आयी रेल
आओ, हिल-मिल खेलें खेल !

आँख-मिचौनी, खो-खो और
दौड़ा-भागी सब-सब ठौर !

टिन्नू मिन्नू पिन्नू साथ
हँस-हँस और मिला कर हाथ !

कूदें - फादें घर दीवार
चाहें जीतें, चाहें हार !

कसरत करना हमको रोज
ताकतवर हो अपनी फौज !

सब कुछ करने को तैयार;
नहीं कभी भी हों बीमार !

आपस में हम रक्खें मेल !
छुक-छुक करती आयी रेल
आओ, हिल-मिल खेलें खेल !

अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें