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12.25.2007
 

हँस-हँस गाने गाएँ हम !
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर

काम हमारा
डॉ. महेन्द्र भटनागर

भारत की आशा हैं हम,
बलवान, साहसी, वीर बनेंगे,
इसकी सीमा-रक्षा को हँस-
हँस, सैनिक रणधीर बनेंगे,
हमको आगे बढ़ते जाना,
हर पर्वत पर चढ़ते जाना,
भूल न पीछे पैर हटाना,
इतना केवल काम हमारा !
कितना सुन्दर, कितना प्यारा !

भारत के दिल की धड़कन हम
थक कर बैठ नहीं जाएँगे,
भूख-गरीबी का युग जब-तक
है, चैन न किंचित पाएँगे,
घर-घर में जा दीप जलाना,
रोते हैं जो उन्हें हँसाना,
आजादी के गाने गाना,
इतना केवल काम हमारा !
कितना सुन्दर, कितना प्यारा !

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