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12.25.2007
 

हँस-हँस गाने गाएँ हम !
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर

हिमालय
डॉ. महेन्द्र भटनागर

भारत-माँ का ताज हिमालय !

ऊँचा-ऊँचा नभ को छूता,
युग-युग जगने वाला प्रहरी,
जगमग-जगमग करता जिसमें
किरनों से मिल बर्फ़-सुनहरी,
तूफ़ानों का या हमलों का
जिसको न कभी भी लगता भय !
भारत-माँ का ताज हिमालय !

बहती जिसमें माला-सी दो
गंगा - यमुना की धाराएँ,
टकरा-टकरा कर छाती से
जिसके जाती बरस घटाएँ,
हरी-भरी की धरती जिसने
किया हमारा जीवन सुखमय !
भारत-माँ का ताज हिमालय !

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