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11.27.2007
 

हँस-हँस गाने गाएँ हम !
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर

अच्छे लड़के
डॉ. महेन्द्र भटनागर

हम बालक हैं, हम बन्दर हैं,
हम भोले-भाले सुन्दर हैं !
हर रोज सुबह उठ जाते हैं,
मुँह धोकर बिस्कुट खाते हैं !

दो कप चाय गरम जब मिलती
तब यह सूरत जाकर खिलती !
फिर, पडितजी से पढ़ते हैं,
हम नहीं किसी से लड़ते हैं !

माँ के कहने पर चलते हैं,
ना रोते और मचलते हैं !
दिन भर हँसते-गाते रहते,
भारत-माता की जय कहते !

हम रहते भाई मिल-जुल कर
हो भला हमें फिर किसका डर ?

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