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01.07.2008
तारों के गीत
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर

तारे और नभ
डॉ. महेन्द्र भटनागर


तुम पर नभ ने अभिमान किया !

नव-मोती-सी छवि को लख कर
अपने उर का शृंगार किया,
फूलों-सा कोमल पाकर ही
अपने प्राणों का हार किया,
कुल-दीप समझ निज स्नेह ढाल
                     तुमको प्रतिपल द्युतिमान किया !
                     तुम पर नभ ने अभिमान किया !

सुषमा, सुन्दरता, पावनता
की तुमको लघुमूर्ति समझकर,
निर्मलता, कोमलता का उर
में अनुमान लगाकर दृढ़तर,
एकाकी हत भाग्य दशा पर
                     जिसने सुख का मधु गान किया !
                     तुम पर नभ ने अभिमान किया !


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