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01.24.2008
तारों के गीत
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर

नभ-उपवन
डॉ. महेन्द्र भटनागर


इनके ऊपर आकाश नहीं ।
इस नीले-नीले घेरे का बस होता है रे अंत वहीं !
                  इनके ऊपर आकाश नहीं !

पर, किसने चिपकाये प्यारे,
इस दुनिया की छत में तारे,
कागज के हैं लघु फूल अरे हो सकता यह विश्वास नहीं !
                         इनके ऊपर आकाश नहीं !

कहते हो यदि नभ का उपवन,
खिलते हैं जिसमें पुष्प सघन,
पर, रस-गध अमर भर कर यह रह सकता है मधुमास नहीं !
                            इनके ऊपर आकाश नहीं !


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