तारों के गीत
कवि : डॉ. महेन्द्र भटनागर


कविता

तारक
जलते रहो
तारों से
तिमिर-सहचर तारक
दीपावली और नक्षत्र-तारक
तारे और नभ
संध्या के पहले तारे से
अमर सितारे
उल्कापात
ज्योति-केन्द्र
नश्वर तारक
नभ-उपवन
इंद्रजाल
ज्योति-कुसुम
जलते रहना
शीताभ
नृत्त
अबुझ
प्रिय तारक
मेघकाल में
जगते तारे