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06.02.2008

 

सञ्जीवनी
रचनाकार
: सीमा सचदेव

भूमिका

 दो-शब्द

भाषा भावों की वाहिका होती है। अपनी काव्य पुस्तक "सञ्जीवनी" में भाषा के माध्यम से एक लघु प्रयास किया है उन  भावों को व्यक्त  करने का जो कभी हमें खुशी प्रदान करते हैं, तो कभी म। कभी हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं और हम अपने आप को असहाय सा महसूस करते हैं।

सञ्जीवनी तीन काव्य-खण्डों का समूह है -

  1. ब्रजबाला

  2. कृष्ण-सुदामा

  3. कृष्ण- गोपी प्रेम

प्रथम खण्ड-काव्य "ब्रजबाला" मे श्री-राधा-कृष्ण के अमर प्रेम और श्री राधा जी की पीडा को व्यक्त करने का, दूसरे खण्ड-काव्य "कृष्ण-सुदामा" मे श्री-कृष्ण और सुदामा की मैत्री मे सुखद मिलन तथा तीसरे खण्ड-काव्य "कृष्ण - गोपी प्रेम" में श्री कृष्ण और गोपियों के प्रेम के को समझने का अति-लघु प्रयास किया है।

यह पुस्तक मेरे भाई स्वर्गीय श्री "मनोज कुमार मिगलानी" तथा दीदी स्व."कुमारी सुमन बाला" को श्रद्धांजली स्वरूप  है

  आशा करती हूँ पाठकों को मेरा यह लघु प्रयास अवश्य पसंद आएगा।

        सीमा सचदेव एम.ए.हिन्दी,एम.एड.,पी.जी.डी.सी.टी.टी.एस.,ज्ञानी

 
 
 
 
 
 
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