राग-संवेदन
रचनाकार : डा. महेंद्र भटनागर
राह का नहीं है अंत चलते रहेंगे हम! दूर तक फैला अँधेरा नहीं होगा जरा भी कम! टिमटिमाते दीप-से अहर्निश जलते रहेंगे हम! साँसें मिली हैं मात्र गिनती की अचानक एक दिन धडकन हृदय की जायगी थम! समझते-बूझते सब मृत्यु को छलते रहेंगे हम! हर चरण पर मंजलें होती कहाँ हैं? ज़िन्दगी में कंकड़ों के ढेर हैं मोती कहाँ हैं?